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मेरठ, जेएनएन : करीब चार साल आबूलेन को रोशन करने वाली सोलर लाइटें रविवार को हटा दी गई। भुगतान नहीं होने से आजिज ठेकेदार ने रविवार को सामान समेट लिया। कैंट बोर्ड की मनमानी का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा।

कैंट बोर्ड के इतिहास में पहली बार ठेकेदार ने भुगतान न होने पर अपना सामान समेटा। अक्टूबर 2015 में तत्कालीन सीईओ राजीव श्रीवास्तव के समय ये सोलर लाइटें लगी थीं। ठेकेदार की माने तो शुरू में तीन लाख रुपये लागत होने की वजह से कैंट बोर्ड ने बगैर टेंडर निकाले सोलर लाइट लगाने की अनुमति दी थी। बाद में लाइटों की कीमत बढ़ गई। सोलर लाइटों को लगाने में करीब पांच लाख रुपये खर्च हुए। इसका आज तक भुगतान नहीं हुआ। ठेकेदार ने बताया कि कैंट बोर्ड में भुगतान की जगह मौखिक आश्वासन मिलता रहा। रविवार को जब ठेकेदार के आदमी आबूलेन से लाइटें उतार रहे थे तो राजस्व विभाग के कर्मचारी ने सभी को कैंट बोर्ड में इंजीनियरिग विभाग से मिलने को कहा, लेकिन जब ठेकेदार कैंट बोर्ड पहुंचा तो उससे कोई नहीं मिला। वापस लौटने के बाद 22 लाइटें उतार दी गई। ठेकेदार का कहना है कि कैंट बोर्ड में भुगतान की जगह मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। विवश होकर उसे ऐसा कदम उठाना पड़ा, जिसकी सूचना सभी अधिकारियों को दे दी है। वाटर एटीएम भी खराब

छावनी की वित्तीय हालत खराब है। ऐसे में पूर्व में जितने भी काम हुए उसका भुगतान नहीं हो पा रहा है। छावनी में जो वाटर एटीएम लगाए गए हैं, वे भी खराब पड़ा है। लाखों रुपये खर्च करके इसे लगाया गया, लेकिन गर्मी में ये वाटर एटीएम सूखे पड़े रे। जिस कंपनी ने यह वाटर एटीएम लगाया है, उसे इसका मेंटीनेंस का खर्च नहीं मिल पा रहा है। अन्य कार्यो में भुगतान न होने पर ठेकेदार ऐसे कदम उठा सकते हैं। इनका कहना है...

सोलर लाइट लगाने के मामले में जांच रही है। जो भी कर्मचारी इसका दोषी होगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रसाद चव्हाण, सीईओ कैंट बोर्ड

Posted By: Jagran

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