जागरण संवाददाता, मऊ : मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद जैसे महानगरों से प्रवासी कामगारों के गांव वापसी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। किसी को कोरोना का भय सता रहा है तो कोई लॉकडाउन लगने के भय से जल्दी-जल्दी एजेंटों को दोगुनी कीमत देकर टिकट खरीद रहा है और घर आ रहा है। प्रवासी कामगारों की मानें तो महाराष्ट्र प्रशासन लौटते श्रमिकों की जांच को लेकर सतर्कता नहीं बरत रहा है। केवल थर्मल स्क्रीनिग के भरोसे लोगों को ट्रेनों में बैठा दिया जा रहा है। सोमवार को दोपहर बाद जब श्रमिक स्पेशल एक्सप्रेस कुर्ला से मऊ जंक्शन पहुंची तो उससे 126 लोग उतरे।

महानगरों से भागमभाग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मऊ जंक्शन पर न केवल मऊ जिले के लोग थे, बल्कि गाजीपुर, देवरिया, बलिया, अंबेडकर नगर, संतकबीर नगर तक के यात्री चले आ रहे हैं। बात साफ है कि आसपास के किसी जिले का और किसी ट्रेन का कन्फर्म टिकट मिलने पर लोग चल दे रहे हैं। मऊ जंक्शन पर कोरोना जांच के लिए लगाई गई स्वास्थ्य विभाग की टीम आने वाले यात्रियों में जो भी संदिग्ध प्रतीत हो रहा है, उसकी जांच कर रही है। एक यात्री की जांच शुरू होते ही दूसरे यात्री गले व मुंह में स्ट्रिप डालते देखते ही दूसरे रास्तों से निकल भाग रहे हैं। पूछे जाने पर अधिकांश यात्रियों का कहना है कि कुर्ला स्टेशन पर प्रवासी कामगारों की कोरोना जांच को लेकर कहीं कोई सक्रियता नहीं है। उधर, ट्रेन में टीटी कोरोना से इतने भयभीत हैं कि यात्रियों के टिकट को हाथ भी नहीं लगा रहे हैं। कई तो केवल यात्रियों के टिकट हाथ में लेने की बात कहकर दूर से ही देख रहे हैं। इनसेट :

प्रतिक्रिया .. ट्रेनों का चलना बंद हो जाएगा तो क्या करेंगे हम ..

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फोटो - मैं मुंबई के भयांदर में एक दुकान पर काम कर रहा था। लॉकडाउन फिर लगेगा सुना तो गांव आने की तैयारी कर ली। मेरे रिश्तेदार ने जैसे-तैसे टिकट का इंतजाम कराया तो आ पाया हूं। कोरोना हर जगह फैला है। मेरी कहीं कोई कोरोना जांच नहीं हुई। अभी-अभी मऊ जंक्शन आया हूं तो कोरोना जांच हुई है। माहौल अच्छा होगा तो वापस जाऊंगा।

- रमाशंकर, पिलखी, मऊ।

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फोटो - मैं मुंबई में उल्लास नगर इलाके में रहता हूं। एक मीट की दुकान में नौकरी करता हूं। महामारी फैलने के बाद काम-धंधा बहुत कम हो गया है। कोरोना के डर से मुंबई में हमलोग काफी भयभीत हैं। कोई दूसरी परेशानी तो नहीं थी, लेकिन गांव लौट आना ही मुनासिब समझा इसलिए चला आया। घर पर बहन की शादी भी मई में है।

- राजू, बेल्थरारोड

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फोटो - मैं बड़ाला इलाके में रहकर सिलाई का काम करता हूं। अक्टूबर में मुंबई गया था। मुंबई में अब तक मेरी कभी-कोई कोरोना जांच नहीं की गई। आते वक्त भी ट्रेन में कोई कोराना जांच नहीं हुई है। ट्रेन में टीटी पास आने की बजाय दूर से ही टिकट चेक कर रहा था। कोरोना और फिर लॉकडाउन लगने के भय से मैं लौट आया।

- सहादत अली, मुहम्मदाबाद गोहना।

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फोटो - मैं मुंबई के जोगेश्वरी इलाके में रहकर कारपेंटर का कार्य करता हूं। कोरोना का मामला जब से बढ़ना शुरू हुआ है, सब में बौखलाहट है। काम में मंदी आनी शुरू हुई और ट्रेनों के बंद होने का खतरा सताने लगा तो एजेंट को टिकट के मूल्य का दूना पैसा देकर आरक्षित टिकट लिया। इधर आने के बाद सकून महसूस हो रहा है। कोरोना की दूसरी लहर ठंडी होगी तभी जाऊंगा।

- सहाबुद्दीन अली, संतकबीर नगर।

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फोटो - मैं बड़ाला में रहकर बढ़ई का काम कर रहा था। कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद मुंबई में जिसकी अच्छी व्यवस्था नहीं है वे परेशान हैं। ट्रेन बंद हो जाती तो परेशानी होती, इसलिए लौट आया। स्टेशन पर आते समय कोई जांच नहीं हुई। मुंबई में भी कोरोना जांच के लिए किसी ने परेशान नहीं किया।

- शहबाज, संतकबीर नगर।

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फोटो - मुंबई शहर के भांडू में रहकर मैं एक बिस्किट बनाने वाली कंपनी में नौकरी कर रहा था। मालिक ने कुछ दिन पहले कंपनी बंद कर दी। कोरोना पिछले साल की तरह ही बढ़ रहा था। आगे कोई दिक्कत न आए इसलिए किसी तरह टिकट का इंतजाम कर आ गया हूं। एक बार चार माह पहले मुंबई में कोरोना की जांच हुई थी, फिर नहीं कराया। आगे देखा जाएगा।

- मोनू सरोज, बड़हलगंज।

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