जागरण संवाददाता, मुहम्मदाबाद गोहना (मऊ) : केंद्र सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्ट पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में संशोधन किए जाने से सामान्य, पिछड़ा व मुस्लिम वर्ग के लोगों में उभरा आक्रोश रुकने का नाम नहीं ले रहा है। केंद्र सरकार की कार्रवाई से आक्रोशित होकर बुधवार को सामान्य, पिछड़ा व मुस्लिम वर्ग के सैकड़ों लोग एक साथ सड़क पर उतरे।

कस्बे के हुसैनी बाग से निकला यह जुलूस शहीद चौराहे पर शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए पूरे कस्बे का भ्रमण करते तहसील मुख्यालय पहुंचा। वहां तहसील का घेराव किया गया। इस मौके पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश ¨सह ने प्रस्ताव पढ़कर सुनाया जिसे मौजूद लोगों ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री के नाम संबोधित चार सूत्रीय मांगों से युक्त ज्ञापन लोकतंत्र रक्षक सेनानी हाजी नेसार अहमद के हाथों उपजिलाधिकारी हरिराम यादव को सौंपा गया। जुलूस में शामिल लोग 'काला कानून, वापस लो-वापस लो', 'सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करो-सम्मान करो, 'एससी-एसटी एक्ट मुर्दाबाद' 'अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है' का नारा लगा रहे थे। जुलूस में नागेंद्र ¨सह, मिथिलेश ¨सह उर्फ पप्पू ¨सह, लोकदल जिलाध्यक्ष देवेंद्र ¨सह, श्रीकिशुनदास फलहारी बाबा, रामाश्रय राय, नरेंद्र तिवारी, पूर्व प्रमुख द्वय सदावृक्ष ¨सह व सुबाष ¨सह, सभासद आजम खां, मुहम्मद शैब, आशिक खां, व्यापार मंडल अध्यक्ष जगदीश गुप्ता, प्रदीपगुप्ता, विपिन बर्नवाल पूर्व सभासद, हरिकेश राय, महेंद्र ¨सह व लल्लन ¨सह, अजीमुल्ला, मनोज श्रीवास्तव, आशुतोष ¨सह, शारदा राजभर, राजेश राय, बंशनारायण, राजभर, बालचंद चौहान, श्याम बिहारी तिवारी आदि थे। ये रहीं प्रमुख मांगें

-सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससी-एसटी एक्ट के संबंध में 20 मार्च के निर्णय को बहाल किया जाए।

-एससी-एसटी एक्ट में फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले तथा करने वाले को 10 साल कारावास का प्रावधान किया जाय।

-एससी-एसटी एक्ट में बंदी व्यक्ति यदि न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किया जाय तो उसे एक करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए ताकि पीड़ित की आर्थिक, सामाजिक, मानसिक व शारीरिक क्षति की पूर्ति हो सके।

-एसटी-एससी एक्ट में अग्रिम जमानत की व्यवस्था की जाए।

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