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मऊ के किसानों को भा रही ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, सरकार दे रही 80 से 90 फीसदी सब्सिडी

Published: Fri, 09 Oct 2026 02:49 PM (GMT+05:30)

मऊ जिले के 263 किसानों ने पानी बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाई है। उद्यान विभाग 80-90% अनुदान दे रहा है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. मऊ के 263 किसानों ने ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाई।

  2. उद्यान विभाग 80-90% तक का अनुदान प्रदान कर रहा है।

  3. यह विधि पानी बचाती है और फसल की पैदावार बढ़ाती है।

जागरण संवाददाता, मऊ। पानी की बचत व पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले के किसान आगे आए हैं। अप्रैल माह में खेत खाली होने व पंजीकरण शुरू होने के साथ ही जिले के 263 किसानों ने अपने खेत में ड्रिप व स्प्रिंकलर विधि से सिचाई के लिए पाइप लगवाया है।

उद्यान विभाग द्वारा इसके लिए किसानों को 80 से 90 प्रतिशत तक का अनुदान भी दिया जा रहा है। यही नहीं धान के फसल की कटाई होने के पश्चात किसान पुन: इसकी पाइप अपने-अपने खेतों में लगावाएंगे। इसके लिए वे विभाग में पंजीकरण भी शुरू कर दिए हैं।

ड्रिप व स्प्रिंकलर से सिंचाई करने से न केवल पानी की बचत होती है बल्कि पौधों को उतना ही पानी मिलता है जितनी उसकी आवश्यकता होती है। इससे कम पानी में किसान को अच्छी पैदावार मिल जाती है तथा स्प्रिंकलर हवा उड़ने वाले नाइट्रोजन को पानी के सहारे सीधे पौधों को देता है। यही नहीं इससे खेत में दवा का छिड़काव करना भी आसान हो जाता है।

बार-बार पाइप लगाने से मिल जाती है राहत

किसान को खेत में पानी चलाने के लिए ट्यूबवेल से लेकर खेत तक बार-बार पाइप बिछाना पड़ता है। यही नहीं इसके लिए श्रमिक आदि लगाने पर उसकी खेती की लागत भी बढ़ जाती है। लेकिन खेत में पाइप बिछवा देने के बाद श्रमिक की लागत कम हो जाती है तथा पानी भी बर्बाद नहीं होता है। यही नहीं बिना किसी श्रम के पूरे खेत में एक स्थान से ही पानी चलाया जाना भी आसान हो जाता है।

ड्रिप व स्प्रिंकलर लगवाने के लिए किसान आंशिक रकम जमा कर विभाग में पंजीकरण करा सकते हैं। धान की फसल कटने के बाद ही इसे लगाया जाना शुरू हो जाएगा। खेत में चारों तरफ पाइप बिछाए जाने से उन्हें बार-बार खेत में घूमने की आवयश्कता नहीं होगी। किसान एक स्थान पर बैठ कर ही अपने सभी खेत में पानी चला सकेंगे। -श्रीराम सिंह, जिला उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण अधिकारी।