महात्मा गांधी पेंशन योजना: 60 की उम्र के बाद निर्माण श्रमिकों को नहीं होगी पैसों की तंगी, मिलेगी 1000 रुपये पेंशन
उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की महात्मा गांधी पेंशन योजना 60 वर्ष से अधिक आयु के पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को ₹1000 मासिक पेंशन प्रदान करती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
60 वर्ष से अधिक आयु के निर्माण श्रमिकों को पेंशन।
महात्मा गांधी पेंशन योजना के तहत ₹1000 मासिक सहायता।
10 वर्ष पंजीकरण और नियमित अंशदान अनिवार्य है।
जागरण संवाददाता, मऊ। बुजुर्ग पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा एवं बुढ़ापे में सहारा देने के लिए उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से महात्मा गांधी पेंशन योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत 60 वर्ष की आयु पूरी करने वाले और बोर्ड में कम से कम 10 वर्ष तक पंजीकृत रहने वाले पात्र श्रमिकों को शुरुआत में 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी।
पेंशन राशि में प्रत्येक दो वर्ष बाद 50 रुपये की वृद्धि का प्रावधान है। इस तरह पेंशन अधिकतम 1250 रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है। योजना का लाभ लेने के लिए श्रमिक का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना और किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ नहीं लेना अनिवार्य है।
इसके साथ ही श्रमिक को पंजीकरण के बाद निर्धारित अंशदान 20 रुपये प्रतिमाह जमा करना होगा। पंजीयन के बाद लगातार सदस्यता बनाए रखना और समय-समय पर नवीनीकरण कराना भी जरूरी है। 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर श्रम विभाग में पेंशन के लिए आवेदन करना होगा।
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पात्रता की जांच के बाद पेंशन शुरू की जाएगी। श्रमिक की मृत्यु होने पर पेंशन का लाभ उसके पति या पत्नी को दिया जा सकता है। इससे परिवार को आर्थिक सहारा मिल सकेगा।
महात्मा गांधी पेंशन योजना के तहत कई श्रमिकों ने पंजीकरण तो कराया, लेकिन कुछ दिनों या दो वर्ष तक अंशदान जमा करने के बाद सदस्यता जारी नहीं रखी। कुछ श्रमिकों ने नवीनीकरण भी नहीं कराया। ऐसे में निर्धारित पात्रता पूरी नहीं होने के कारण उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल सका। विभाग द्वारा शिविर लगाकर निर्माण श्रमिकों को योजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है, जिससे पात्र श्रमिक नियमित अंशदान जमा कर बुढ़ापे में पेंशन का लाभ प्राप्त कर सकें।- प्रभात कुमार सिंह, सहायक श्रमायुक्त
