जयप्रकाश निषाद, मऊ

सरकार पीड़ित व आम आदमी के लिए कुछ ऐसी भी योजनाएं चला रही है जिसकी जानकारी भी लोगों को नहीं है। जागरूकता के अभाव में यह योजनाएं धड़ाम हो गई हैं। इस तरह योजनाओं में एक महिला कल्याण विभाग की तरफ से संचालित है स्पांसरशिप योजना। इस योजना के लिए जनपद में एक भी आवेदन नहीं आए हैं। इस योजना के तहत सरकार हर पीड़ित परिवार के बच्चों की पढ़ाई के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह उपलब्ध कराती है लेकिन सरकार व विभाग की नीतियों की अदूरदर्शिता के कारण औंधे मुंह पड़ जाती हैं। इसका उदाहरण आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को दी जाने वाली केंद्र सरकार की स्पांसरशिप योजना है। इसमें बच्चों को प्रति माह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इस योजना का लाभ 18 वर्ष तक के बच्चों को मिलेगा। योजना की शर्ते ऐसी हैं कि उन्हें पूरा करना सभी के लिए संभव ही नहीं है। योजना के नियम बनाने वालों ने ऐसा करके बच्चों से मजाक किया है। इसे लेकर तरह-तरह के सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं। इतनी महत्वपूर्ण योजना और एक भी आवेदक नहीं, यह जनपद के लिए ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। इस योजना के लिए पात्रता की शर्त के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 46080 व शहरी क्षेत्र के लिए 56460 रुपये का आय प्रमाण पत्र जरूरी है।

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स्पांसरशिप योजना की यह हैं शर्तें ::::

- बच्चा किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संगठन से कोई सुविधा या लाभ न लेता हो।

- बच्चे का किसी स्कूल में जाना अनिवार्य है।

- बच्चे का आधार पंजीकरण होना चाहिए।

- बच्चे का अपना बैंक खाता हो और आधार से लिक हो।

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यह बच्चे उठा सकते हैं इसका लाभ ::::::::

- जो बच्चे अनाथ हैं और संयुक्त परिवार के साथ रहते हैं।

- बच्चे की मां विधवा या तलाकशुदा हो।

- मां को परिवार ने बेसहारा छोड़ दिया हो।

- दुर्घटनाग्रस्त में माता-पिता दिव्यांग हो गए हों।

- माता-पिता किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हों।

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पिछले वर्ष भी इस योजना के लिए कोई आवेदन नहीं आया था। इस साल एक-दो आवेदन करने वाले दिख रहे हैं लेकिन तमाम लोग दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए भी कोई मद नहीं आता है। इसकी वजह से इसका प्रचार-प्रसार भी नहीं हो पाता है।

--समर बहादुर सरोज : जिला प्रोबेशन अधिकारी मऊ।

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