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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 01, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पूराघाट बरलाई मार्ग के निर्माण की जगी आस

By JagranEdited By:
Published: Fri, 01 Oct 2021 09:47 PM (IST)

जागरण संवाददाता मऊ पिछले कई वर्षों से जर्जर पूराघाट-बरलाई मार्ग के निर्माण की आस जगने

पूराघाट बरलाई मार्ग के निर्माण की जगी आस
पूराघाट बरलाई मार्ग के निर्माण की जगी आस

जागरण संवाददाता, मऊ : पिछले कई वर्षों से जर्जर पूराघाट-बरलाई मार्ग के निर्माण की आस जगने लगी है। लोक निर्माण विभाग इस मार्ग को दुरुस्त करने के लिए खाका तैयार करने में जुटा है। पूरी तरह जर्जर मार्ग को सही कराने के लिए पिछले कई वर्षो से मांग चल रही है। लेकिन बजट कम आवंटित होने के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया था। इसी मार्ग पर बैजापुर के पास पिछले दिनों दो सप्ताह के भीतर ही तीन लूट की घटनाएं हुई है। इसके चलते मार्ग को सही कराने मांग और तेज हो गई है।

मार्ग का निर्माण वर्ष 1990 में कराया गया था, तबसे दो बार इसकी मरम्मत के लिए बजट आया लेकिन कागजों में ही कार्य दिखाकर पैसों का बंदरबाट कर लिया गया। सड़क की हालत इतनी जर्जर है कि दो और चार पहिया तो दूर की बात है, इस पर पैदल चलना भी मुश्किल है। पूरी सड़क बड़े-बड़े गढ्डों में तब्दील हो चुकी है। पिछले दिनों लोक निर्माण विभाग ने मार्ग के निर्माण के लिए शासन को पत्र लिखकर बजट की मांग की थी। लेकिन बजट ज्यादा मांग होने के कारण शासन से मनाही हो गई। इसके बाद सड़क के निर्माण का कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग को दे दिया गया। मगर यहां भी बजट की कमी से निर्माण कार्य नहीं हो सका। विभाग की माने तो सबसे पहले पुराने गढ्डों को भरने का कार्य किया जाएगा फिर मार्ग को जिस विभाग का हैंडओवर किया जाएगा, वह उसका निर्माण कराएगा।

जागरण संवाददाता, रामपुर बेलौली (मऊ) : बेलौली-भीमपुरा मुख्य मार्ग का मऊ जनपद में पड़ने वाला हिस्सा अत्यंत जर्जर व गड्ढों का पर्याय बन गया है। इस पर पैदल चलना दुश्वार है। आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

बरसात का मौसम होने से डेढ़ से ढाई फीट गहरे गड्ढों में अंदाज नहीं मिलने से दो पहिया वाहनों वाले अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं। सड़कों की हालत सुधारने के नाम पर प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे बैठे हैं। रामपुर थाना से जनपद की आखिरी सीमा पर स्थित कांठतरांव गांव तक दूरी मात्र तीन किलोमीटर है। इसके काठतरांव से भीमपुरा तक बलिया जनपद में पड़ने वाले हिस्से का चौड़ीकरण एवं लेपन कार्य भी हो चुका है। जबकि मऊ जनपद में पड़ने वाला भाग उपेक्षित है। इसका चौड़ीकरण नहीं हो सका है। इस पर चलते छोटे-बड़े वाहनों के हिचकोले से पलटने का भय बना रहता है। क्षेत्र के प्रो. शिवाकांत मिश्र, चंद्रकांत मौर्य, विजय जायसवाल, पिटू तिवारी आदि ने जनहित में तत्काल मरम्मत के अलावा चौड़ीकरण व लेपन की मांग की है।

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