जागरण संवाददाता, मऊ : जनपद में एक तरफ जहां सीएम योगी के आगमन को लेकर डीएम से लेकर चपरासी तक सभी छुट्टी होने के बाद अपनी जिम्मेदारी को निभाने में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य महकमे में सीएम से डर नहीं है, ये जानते हैं कि निलंबित भी होने के बाद प्राइवेट प्रैक्टिस तो चलना ही है। रोज हजारों की कमाई भी हो जानी है। फिर इनको पीएम और सीएम के आगमन से क्या मतलब है। जी हां, हम बात कर रहे हैं, जिला अस्पताल की। जहां आपातकालीन कक्ष में मरीज तड़फड़ा रहे थे, लेकिन वहां तैनात चिकित्सक का कही कोई अता-पता नहीं था।

पूछने पर वहां तैनात कर्मचारी बस यही बता रहा था कि डाक्टर साहब इधर ही तो गए हैं लेकिन कोई भी चिकित्सक की सही लोकेशन बताने को तैयार नहीं था। योगी सरकार एक तरफ स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाने के लिए तमाम योजनाएं संचालित कर रही हैं लेकिन जिले पर तैनात स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार योजना का लाभ लोगों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि आपातकालीन कक्ष में भी मरीजों का उपचार सही तरीके से नहीं हो रहा है। अगर इसी तरह चलता रहा तो आए दिन मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ेगी।

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मामले की शिकायत अभी तक मुझे नहीं मिली है, किसी भी चिकित्सक को आपातकालीन कक्ष से इधर-उधर जाने की अनुमति नहीं दी गई है अगर मरीजों को कोई भी परेशानी होती है, तो संबंधित चिकित्सक पर कार्रवाई की जाएगी।

-डा.सतीश चंद सिंह, सीएमओ।

Posted By: Jagran

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