जागरण संवाददाता, मऊ : प्रदेश बार काउंसिल के आह्वान पर शुक्रवार को अधिवक्ताओं की बैठक पुस्तकालय भवन में हुई। इसमें सर्व सम्मति से बार काउंसिल के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए विरोध दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने जुलूस निकालकार मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मुख्य राजस्व अधिकारी को सौंपा।

इसमें तीस हजारी कोर्ट नई दिल्ली में पुलिस अधिकारियों द्वारा किए गए फायरिग में घायल अधिवक्ताओं को ?10 लाख मुवावजा दिलाए जाने तथा जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने सहित सात सूत्रीय मांगों के संदर्भ में ज्ञापन दिया गया। मांग किया है कि प्रदेश में जिन अधिवक्ताओं की हत्या हुई है उनके हत्यारों की गिरफ्तारी व दोषी लोगों के विरूद्ध अधिकतम तीन माह के अंदर साक्ष्यों की जांच पूरी कर दोषियों को दंडित किया जाए तथा ?20 लाख की आर्थिक सहायता मृतक आश्रितों को प्रदान की जाए। वकीलों ने उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति से अधिवक्ताओं के वर्षों से लंबित दावों का निस्तारण कराना सुनिश्चित किए जाने और नए अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन भत्ता दिया जाना प्रारंभ किए जाने की मांग की। वहीं अधिवक्ता भविष्य निधि की धनराशि को सवा लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख किए जाने, किसी भी पुलिस अधिकारी व सिपाही को न्यायालय परिसर में असलहा को लेकर प्रवेश न करने तथा अधिवक्ताओं के जान-माल की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाने व अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम यथाशीघ्र पारित किए जाने की मांग की गई। अध्यक्षता सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शमशुल हसन एवं संचालन महामंत्री दरोगा सिंह ने किया। इस अवसर पर अमरनाथ सिंह, वीरेंद्र बहादुर पाल, देवेंद्र सिंह, घनश्याम सिंह, शशिप्रकाश सिंह तेगा, हरिद्वार राय, अरविद तिवारी, राजेंद्र राय, मान सिंह यादव, प्रभुनाथ सिंह, इफ्तेखार अहमद, फतेह बहादुर सिंह आदि अधिवक्ता उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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