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वृंदावन में धीरेंद्र शास्त्री के भगवान कृष्ण पर दिए बयान का धर्माचार्यों ने किया समर्थन, 'लिफाफे' पर मचा बवाल

Published: Thu, 05 Nov 2026 08:26 PM (IST)

वृंदावन में संतों और धर्माचार्यों ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीकृष्ण पर दिए बयान का समर्थन किया।

बैठक के दौरान 'लिफाफे' को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए, जिससे धर्माचार्यों में आपसी विवाद हो गया।

बैठक के दौरान 'लिफाफे' को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए, जिससे धर्माचार्यों में आपसी विवाद हो गया।

HighLights

  1. धीरेंद्र शास्त्री के श्रीकृष्ण पर बयान का संतों ने किया समर्थन।

  2. बैठक में 'लिफाफे' के आरोपों पर धर्माचार्यों में हुई बहस।

  3. आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने हस्तक्षेप कर विवाद को शांत किया।

संवाद सहयोगी, जागरण, वृंदावन। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान श्रीकृष्ण पर दिए गए टेढ़े-मेढ़े ठाकुरजी वाले बयान के समर्थन में गुरुवार को संत व धर्माचार्यों ने बैठक कर इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हो रहे उनके विरोध में दिए जा रहे गलत बयानों का विरोध किया। लेकिन, बैठक के बीच ही धर्माचार्याें में उस समय आराेप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया जबकि ब्रज तीर्थ देवालय न्यास से जुड़े एक मंदिर के सेवायत ने लिफाफा लेकर बयान बदलने का सीधा आरोप वृंदावन के लोगों पर लगा दिया।

देखते ही देखते बैठक में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए और बीच बचाव में आए आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने सभी को समझाबुझाकर शांत करवाया। तब जाकर बैठक में मौजूद संत, धर्माचर्याें ने कहा आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने गलत बयान नहीं दिया, जो भी भगवान श्रीकृष्ण के बारे में कहा वह शास्त्रों में उल्लिखित है।

राधाकांत मंदिर में गुरुवार को ब्रज तीर्थ देवालय न्यास एवं धर्म रक्षा संघ ने संयुक्त रूप से महांत फूलडोलबिहारी दास की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की। बैठक में धीरेंद्रकृष्ण शस्त्री के बयान को लेकर उत्पन्न हुए विवाद पर आचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने कहा भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप सनातन धर्म की प्राचीन व दिव्य परंपरा का अंग है। इस अलौकिक स्वरूप का वर्णन भक्त कवियों, रसिक संतों, आचार्याें ने सदियों पहले किया है।

ऐसे में किसी भक्त द्वारा आराध्य के स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करना अपमान नहीं। महंत हरिशंकर दास नागा ने कहा हमारे रसिक संतों ने ठाकुरजी की बांकी चितवन, बांकी अदा और त्रिभंगी मुद्रा का बड़े प्रेम से वर्णन किया है। सौरभ गौड़ ने कहा बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म और हिंदू समाज को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उनके बयान पर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। आरके पांडे ने कहा ब्रजभूमि के कण-कण में भगवान श्रीकृष्ण का वास है।

शास्त्री के बयान को ब्रज की इसी रसिक परंपरा के आलोक में समझने की जरूरत है। महांत फूलडोल बिहारी दास ने कहा भगवान व भक्त के बीच प्रेम, वात्सल्य, सख्य तथा माधुर्य भाव की समृद्ध परंपरा है। जब तक किसी कथन के पीछे दुर्भावना न हो, तब तक उसे अनावश्यक विवाद नहीं बनाना चाहिए।

रमाकांत गोस्वामी, स्वामी देवानंद परमहंस, आनंद बल्लभ गोस्वामी ने भी शास्त्री के बयान का समर्थन किया। आरोप प्रत्यारोप उस समय शुरू हुए जबकि नंदगांव के सेवायत हरिमोहन गोस्वामी ने कहा कई संत, कथावाचक अनर्गल बयान देते आए हैं, हमने विरोध किया तो हमें एक बड़े संत ने लिफाफा दिया, हमने लिफाफा ये कहकर लौटा दिया कि ये परंपरा वृंदावन वालों की है।

बस इसके बाद आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए। रोहित रिछारिया, विनय त्रिपाठी, रमाकांत गोस्वामी, आचार्य सुमंत कृष्ण शास्त्री, पंकज चतुर्वेदी, महांत सुंदर दास, महांत दशरथ दास, स्वामी अतुल कृष्ण दास, पंडित बाबा, स्वामी रामदास, सुमित गौतम, आचार्य अनमोल, राम अभिलाष मिश्रा, आचार्य संगम, महंत मोहिनी बिहारी शरण, आचार्य यदुनंदन, शैलेंद्र कृष्ण, संजय हरियाणा मौजूद रहे।

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