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मथुरा में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर जालसाजों ने 5 लोगों को बनाया ठगी का शिकार, 36.40 लाख हड़पे

Published: Thu, 28 May 2026 04:12 PM (IST)

वृंदावन में एक व्यक्ति ने पांच बेरोजगारों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 36.40 लाख रुपये ठग लिए।

प्रतीकात्मक तस्वीर

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संवाद सहयोगी, वृंदावन। बेरोजगार लोगों को सेना से लेकर सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर पांच लोगों से एक व्यक्ति ने 36 लाख 40 हजार रुपये ठग लिए। पीड़ित ने कोतवाली में आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

कोतवाली में दर्ज करवाए मुकदमे में थाना मोगर्रा के नगला देवरिया निवासी रिंकू सिंह ने कहा कि दिसंबर 24 में उसकी मुलाकात सुरीर निवासी दीपक राघव से हुई। जो कि ओमेक्स सिटी के ब्रज अपार्टमेंट 2003 में अपना कार्यालय चलाता है। पीड़ित इंटरमीडिएट तक ही शिक्षित है और बेरोजगार था, ऐसे में आरोपित ने उसे सेना में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और दस लाख रुपये में नौकरी लगाने की बात कही।

आरोपित ने कई कागजात ऐसे दिखाए जिसमें कई लोगों को उसने नौकरी दिलवाई हो। झांसे में आकर पीड़ित ने परिवार में बात की तो पिता व स्वजन भी उससे मिलने ओमेक्स स्थित कार्यालय में आए और आरोपित द्वारा दिखाए गए कागजातों के आधार पर भरोसा होने पर न केवल पीड़ित रिंकू बल्कि पीड़ित की भाभी सरिता, ताऊ का बेटा प्रवीन, भाई का साला विकास, बहन का देवर देवराज जो सभी बेरोजगार थे, सभी की सरकारी नौकरी की बात हुई और प्रति नौकरी पर दस लाख रुपये देना भी तय हो गया।

पीड़ित का आरोप है इसी भरोसे को लेकर पीड़ित ने बैंक एकाउंट और नकदी में कई बार आरोपित को पैसे दिए। इसमें शुरुआत में 80 हजार 29 जून 25 को दिए। इसके बाद 30 जून को 98 हजार, दो जुलाई को 90 हजार, तीन को 90 हजार, चार को 92 हजार, सात को 90 हजार, 13 जुलाई को दस हजार रुपये आरोपित को दिए।

इसके बाद सात जुलाई 25 को आरोपित ने पीड़ित रिंकू सिंह को सेना में नौकरी का नियुक्तपत्र देकर जैसलमेर ट्रेनिंग पर जाने की बात कही तो पीड़ित परिवार ने 15 अगस्त 25 को पांच लाख, 17 को 50 हजार, 18 को साढ़े चार लाख, 29 अगस्त 25 को दस लाख, तीस अगस्त को चालीस हजार, 29 सितंबर 25 को 50 हजार रुपये दे दिए।

कुल 36 लाख 40 हजार रुपये आरोपित के पास पहुंच गए। तो आरोपित ने पहले तो 21 सिंतबर 25 को रिंकू व विकास को जैसलमेर ट्रेनिंग के लिए भेजा, जहां वे एक महीने होटल में रुके लेकिन, कोई ट्रेनिंग नहीं हुई। इसी तरह प्रवीन, पंकज को दिल्ली शास्त्री भवन के समीप एक फ्लैट में रुकवा दिया।

ये दोनों दो महीने यहां रुके। यहां भी कोई नौकरी नहीं लगी। जब पीड़ित परिवार को शक हुआ तो पहले तो आरोपित दीपक राघव टालमटोल करने लगा। लेकिन, बाद में पैसे लौटाने से इंकार करते हुए कहा हम इसी तरह बेरोजगारों को झांसे में लेकर पैसे लेते हैं। पीड़ित रिंकू सिंह ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर मामले में कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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