वृंदावन: ISKCON के संस्थापक श्रील प्रभुपाद को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे 10 हजार विदेशी भक्त
इस्कॉन संस्थापक श्रील प्रभुपाद का तिरोभाव महोत्सव 13 नवंबर को वृंदावन में भव्यता से मनाया जाएगा।

10 हजार से अधिक विदेशी भक्त पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे।
HighLights
श्रील प्रभुपाद तिरोभाव महोत्सव 13 नवंबर को वृंदावन में।
दस हजार से अधिक विदेशी भक्त करेंगे पुष्पांजलि अर्पित।
मंगला आरती, पुष्पांजलि और संगोष्ठी मुख्य आकर्षण।
संवाद सहयोगी, वृंदावन। इस्कॉन (ISKCON) संस्थापक श्रील प्रभुपाद ने दुनियाभर में लोगों को वैदिक सनातन परंपरा से जोड़ने के साथ वृंदावन को अपनी आस्था का मुख्य केंद्र बनाया। उन्होंने भारत में पहला इस्कॉन मंदिर वृंदावन में ही स्थापित किया, अपने जीवन का अंतिम पड़ाव भी यहीं बिताया और यहीं समाधि ली।
13 नवंबर को श्रील प्रभुपाद का तिरोभाव महोत्सव इस्कॉन मंदिर में भव्य धार्मिक आयोजनों के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्रील प्रभुपाद को पुष्पांजलि अर्पित करने और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए 10 हजार से अधिक विदेशी भक्त मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान इस्कॉन के पदाधिकारी श्रील प्रभुपाद के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित अपने अनुभव विदेशी भक्तों के साथ साझा करेंगे।
श्रील प्रभुपाद ने वृंदावन की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दी। वैदिक पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में वृंदावन का महात्म्य सदियों से दर्ज था, लेकिन श्रील प्रभुपाद द्वारा 'हरे कृष्ण आंदोलन' की शुरुआत और इस्कॉन की स्थापना के बाद दुनिया भर में वृंदावन का नाम गूंज उठा। उनका स्पष्ट मानना था कि यदि विदेशों में बढ़ रहे कृष्ण भक्तों को सनातन संस्कृति से गहराई से जोड़ना है, तो इसका केंद्र वृंदावन को ही बनाना होगा।
विदेश यात्राओं के बाद वृंदावन लौटकर श्रील प्रभुपाद ने वर्ष 1972 में इस्कॉन मंदिर की आधारशिला रखी, जो 1975 में बनकर तैयार हुआ। इसका उद्घाटन स्वयं उन्होंने किया। इसके बाद उन्होंने मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और बंगाल के मायापुर समेत कई स्थानों पर भव्य इस्कॉन मंदिरों की स्थापना की, लेकिन उनका मुख्य जुड़ाव वृंदावन से बना रहा। यहां उन्होंने मंदिर के साथ ही गोशाला और भक्तिवेदांत इंटरनेशनल गुरुकुल की भी शुरुआत की। श्रील प्रभुपाद ने अपने जीवन का अंतिम समय वृंदावन में ही बिताया और 14 नवंबर 1977 को श्रीमद्भगवद्गीता का श्रवण करते हुए उन्होंने अंतिम सांस ली।
तिरोभाव महोत्सव में जुटेंगे कई देशों के श्रद्धालु
इस्कॉन प्रवक्ता रविलोचन दास ने बताया कि 13 नवंबर को आयोजित होने वाले तिरोभाव महोत्सव की शुरुआत सुबह मंगला आरती के साथ होगी। इसके बाद श्रील प्रभुपाद के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी और ठाकुर जी का दिव्य शृंगार कर उन्हें नई पोशाक धारण कराई जाएगी। दोपहर में आयोजित संगोष्ठी में इस्कॉन के वरिष्ठ विद्वान और विदेशी भक्त अपने विचार साझा करेंगे।
इस महोत्सव में शामिल होने के लिए अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, रूस, यूक्रेन, तुर्किए, इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, ब्राजील और अर्जेंटीना सहित कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुंच रहे हैं।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।