अभय गुप्ता, सुरीर(मथुरा) : वो न बोल सकता है और न सुन सकता है। मगर अपनी प्रतिभा के बूते इस दिव्यांगता को मात दे रहा है। बैडमिंटन में राष्ट्रीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं में जीते सोने-चांदी के पदक उसकी आवाज बन गए हैं। यही 'आवाज' सुन राष्ट्रपति उसे दिल्ली में 22 जनवरी को राष्ट्रीय बाल शक्ति पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। गणतंत्र दिवस परेड में भी उसे शामिल होने का मौका मिलेगा।

कस्बा सुरीर निवासी खगेश बहादुर वाष्र्णेय पूर्व जज हैं। सुरीर के अलावा उनका मेरठ में भी मकान है। उनका पौत्र विनायक बहादुर बोलने-सुनने में दिव्यांग है। मेरठ के शांति निकेतन विद्यापीठ में आठवीं कक्षा का छात्र है। विनायक ने सात वर्ष की उम्र से बैडमिटन खेलना शुरू कर दिया था। चौदह वर्ष तक आते-आते उसने सफलता के नए आयाम छू लिए हैं।

विनायक ने अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर चार स्वर्ण, तीन रजत व एक कांस्य पदक जीते हैं। राज्य स्तर पर 10 स्वर्ण, 9 रजत व तीन कांस्य पदक जीते हैं। उसे बिहार दिव्यांग खेल समारोह 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी द्वारा अजातशत्रु अवार्ड मिल चुका है।

केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय की ओर से आए पत्र में विनायक को इस बार राष्ट्रीय बाल शक्ति पुरस्कार के लिए चुना गया है। 22 जनवरी को राष्ट्रपति द्वारा उसे राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जाएगा। विनायक 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की परेड में भी शामिल होगा। विनायक के पिता दीपक बहादुर भी ऐसे ही दिव्यांग हैं। वे मेरठ में बैंककर्मी हैं। उन्हें भी वर्ष 2018 में सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी का पुरस्कार उपराष्ट्रपति ने दिया था।

Posted By: Jagran

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