जागरण संवाददाता, मथुरा : लॉकडाउन में कामकाज ठप हो गए। बड़े और लघु उद्योगों को राहत तो दी गई, लेकिन बाजार बंद हैं, ऐसे में माल जाए भी तो कहां। अनुमति के बाद भी उद्योगों का पहिया घूमा तक नहीं है। अब लॉकडाउन चार की तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में उद्यमियों को सरकार से बड़ी अपेक्षाएं थीं। बुधवार को केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान किया तो उद्यमी भी खुश हो गए। बोले, इससे उद्यमी, व्यापारी और छोटा-मोटा व्यापार करने वालों को राहत मिलेगी। कुछ को केंद्र का राहत पैकेज भा गया, तो किसी की उम्मीदें ही टूट गईं। उद्यमियों के बोल

छोटे व पटली व्यापारियों की आशाओं पर राहत पैकेज खरा नहीं उतरा। व्यापारी के लिए कुछ नहीं दिया। केवल फैक्ट्री सेक्टर और उसके मजदूरों को राहत मिली है।

अजय चतुर्वेदी, नगर अध्यक्ष, नगर उद्योग व्यापार मंडल व्यापारी को ऋण नहीं रियायत चाहिए। ऋण का उसे ब्याज सहित चुकाना है, जबकि आज उसकी स्थिति ऐसी है कि उसको सभी प्रकार के फिक्स देय सभी चुकाने हैं। सरकार मध्यम वर्गीय दुकानदारों पर ध्यान दे।

अजय गोयल, जिला महामंत्री, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल सरकार को पर्यटन से काफी आय होती है। यह बहुत बड़ा क्षेत्र है। पर्यटन क्षेत्र में होटल उद्योग को विशेष राहत पैकेज में जीएसटी व आयकर में छूट देनी चाहिए थी। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता।

अनुराग गोस्वामी, होटल व्यवसायी सभी सेक्टरों को कुछ दिया है। आगे इससे मिलने वाले लाभ ही तय करेंगे की व्यापारी के लिए ये राहत पैकेज कितना खरा उतरता है। इसके कितने लाभी उसके मिल पाते हैं।

-अशोक प्रताप सिंह, होटल व्यवसायी अधिकांश कपड़ा व्यापारियों ने कैश क्रेडिट लिमिट बनवा रखी है। इसमें व्यापारी जितना पैसा उपयोग करता है उसपर ब्याज लगती है। ये माफ होती तो अधिक राहत मिलती।

-महावीर मित्तल, अध्यक्ष, मथुरा छपी साड़ी व्यापार मंडल। लघु उद्योगों को अनसिक्योर लोन का प्रावधान किया है। इससे थोड़ी लिक्युडिटी बढ़ेगी। उद्योगों के पास पैसा आएगा। इससे उनके काम करने की क्षमता बढ़ेगी।

-मुकुल मित्तल, कपड़ा व्यापारी इसमें छोटे व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिली है। इससे केवल बड़े उद्योगों को ही लाभ मिलेगा। सरकार को छोटे व्यापारियों के बारे में सोचना चाहिए था। जिससे उनका भी व्यापार चल सके।

अजयकांत गर्ग, जिला उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल व्यापारिक संगठनों को बंद हुए दो महीने होने को आए। ऐसे में छोटा व्यापारी कर्ज में दब गया है। इसमें सरकार को उनके बिजली के बिल माफ न करने से व्यापारी को झटका लगा है।

केके खंडेलवाल, व्यापारी। लॉकडाउन की अवधि तक सभी वर्ग के व्यापारियों ने सरकार का साथ दिया अब सरकार का निर्णय कई व्यापारियों के हित में है। मगर कई व्यापारी इससे खुश नहीं हैं।

-महेश मित्तल, समाजसेवी। पीएम के पैकेज को केवल गरीब व मध्यम वर्ग के व्यापारियों, दुकानदारों, कुटीर उद्यमियों को देना चाहिए। वहीं दो लाख से पांच करोड़ तक के लोन ही व्यापारियों को दिए जाएं। इससे रोजगार भी बचा रहेगा।

-मुरारी अग्रवाल, प्रांतीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल इस पैकेज का लाभ तभी होगा जब ये राहत सिर्फ बैंकों के माध्यम से पारदर्शी तरीके से दी जाए। इस दौर में भी ऐसा भ्रष्टाचारी सरकारी तंत्र सक्रिय हैं जो इन सरकारी पैसों का बंदरबांट कर सकता है।

-किशोर भरतिया, जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ऐसे कठिन समय में सरकार को छोटे व्यापारियों को बिना गारंटी के लोन देना चाहिए। साथ ही ब्रांडेड को छोड़ स्वदेशी को बढ़ावा देना चाहिए। इससे देश में रोजगार को बढ़ावा भी मिलेगा।

-नवीन नागर, जिला महामंत्री इस समय मध्यम वर्ग का व्यापारी अधिक परेशान है। पिछले तीन महीने से प्रतिष्ठानों की बिजली उपयोग ही नहीं हुई है तो फिर बिजली के फिक्स चार्ज भी न लिया जाए। सरकार को माफ करना चाहिए।

-संजय अल्पाइन, महानगर अध्यक्ष सरकार को धीरे-धीरे दुकान और छोटे उद्योगों को चालू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसी वर्ग को बैंकों से प्राथमिकता पर लोन भी दिया जाना चाहिए जिससे वे व्यापार शुरू कर सकें।

चिराग अग्रवाल, महानगर महामंत्री सरकार द्वारा एमएसएमई के लिए तीन लाख करोड़ की लोन देने की घोषणा से सूक्ष्म व लघु उद्योगों को राहत मिलेगी। व्यापार में लिक्युडिटी आएगी। इसमें कुछ महीने के लिए ब्याज में छूट देने से उद्योगों को प्रोत्साहन मिलता।

-अंकित बंसल, होटल कारोबारी। केंद्रीय वित्त मंत्री ने जो राहत पैकेज की लिस्ट दी है उससे रियल एस्टेट सेक्टर में प्रोजेक्ट पूरा करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे बिल्डर के लिए थोड़ी राहत मिलेगी।

-अशोक अग्रवाल, रियल एस्टेट कारोबारी जून, जुलाई और अगस्त का 24 फीसदी पीएफ अंशदान कर्मचारियों और कंपनियों का सरकार वहन करेगी। पीएफ अंशदान को 12-12 फीसद के बजाए 10-10 फीसद किया गया है। ये अच्छी निर्णय है।

-संजय जिदल, कांक्रेट कारोबारी। सूक्ष्म व लघु उद्योग की परिभाषा बदलना एक सकारात्मक कदम होगा जो उद्योग टर्न ओवर बढ़ने से इसकी लिमिट से बाहर हो जाते हैं उनको अब इसका लाभ मिलेगा। हालांकि असंगठित सेक्टर के लिए कुछ नहीं है।

-तुषार अग्रवाल, गिलट कारोबारी। दस करोड़ निवेश या 50 करोड़ के टर्नओवर पर भी छोटे उद्योग का दर्जा होगा। साथ ही एमएसएमई को ई-मार्केट से जोड़ा जाएगा। इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को फायदा होगा।

कपिल अग्रवाल, कारोबारी। मध्यम और गरीब तबके के आर्थिक विकास के लिए प्रोत्साहन पैकेज सराहनीय कदम है। अभी यह देखना बाकी है, किन-किन क्षेत्र में इसको किस प्रकार विभाजित किया जाएगा।

-डॉ. आशुतोष शुक्ला-प्रबंधक, गिर्राज महाराज ग्लोबल स्कूल

Posted By: Jagran

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