बरसाना(मथुरा), संसू। करत विरद सुखरास ब्रज ठौर-ठौर मन मत कर मन ढीला, देख बरसाने की लीला। जी हां, राधाष्टमी मेला के उपरान्त बरसाना में बूढ़ी लीला महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्राचीन लीलास्थलों पर राधाकृष्ण के स्वरूपों द्वारा उनकी लीलाओं का मंचन किया जाता है।

महोत्सव के चलते ललिता सखी के निज गांव ऊंचा गांव में राधा की गोद भराई, श्याम सगाई व ब्याहवला लीला हुई। राधाकृष्ण की इस लीलाओं को देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।

बरसाना के समीपवर्ती गांव ऊंचा गांव में मंगलवार को बूढ़ी लीला महोत्सव में प्राचीन दाऊजी मंदिर में राधा की गोद भराई, श्याम सगाई व श्रील नारायण भट्ट की समाधि स्थल पर लगन पत्रिका तथा सखीगिरी पर्वत पर ब्याहवाला लीला हुई। भगवान श्रीकृष्ण व राधारानी की इन प्राचीन लीलाओं को देखकर उनके भक्त आनंदित हो उठे। प्राचीन दाऊजी मंदिर पर नन्दलाल कन्हैया की रिति रिवाजों के साथ सगाई की गई। बृषभानु नंदनी की गोद भाराई की रस्म निभाई। श्रील नारायण भट्ट की समाधि स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण की लगन पत्रिका लिखी गई। इन लीलाओं के बाद सखीगिरी पर्वत पर स्थित चित्र विचित्र शिला पर ब्याहवाला लीला का मंचन किया गया। आज ब्याहवलौ होत है श्री हित हरिवंश ललाम, सूर श्याम राधा संग ब्याहे बरसाने में ललाम। आज विहाबलौ होत है सखिगिरी ललिता संग, अन्य सखी संग भावरि लेत है वाहि के संग। आज ब्याहवलौ होत है श्री हित हरिवंश ललाम या में कछु है नहीं सब कछु है निष्काम आदि पदों के गुणगान के साथ सखीगिरी पर्वत पर भगवान श्रीकृष्ण ने ललिता सहित अन्य सखियों के साथ विवाह कर अपनी मनोहर लीला से श्रद्धालुओं का मनमोह लिया। इसके मंचन के दौरान श्रद्धालुओं ने कन्यादान किया। ललिता पीठ के पीठाधीश्वर गोस्वामी कृष्णचंद भट्ट ने बताया कि इन प्राचीन बूढ़ी लीला की शुरुआत श्रील नारायण भट्ट ने साढ़े पांच सौ साल पहले ही कर दी थी।

Posted By: Jagran

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