शरद पूर्णिमा पर श्वेत वस्त्र और मुरली में मनोहारी छवि, दो घंंटे ज्यादा दर्शन देंगे ठाकुर बांकेबिहारी
वृंदावन में शरद पूर्णिमा पर ठाकुर बांकेबिहारी श्वेत वस्त्र और मुरली धारण कर भक्तों को महारास की अलौकिक झांकी के ...और पढ़ें

ठाकुर बांकेबिहारी का फाइल फोटो।
HighLights
ठाकुर बांकेबिहारी श्वेत वस्त्र और मुरली में मनोहारी दर्शन देंगे।
शरद पूर्णिमा पर साल में एक बार महारास की अलौकिक छवि।
श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु मंदिर दर्शन का समय दो घंटे बढ़ा।
संवाद सूत्र, वृंदावन (मथुरा)। शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में जब ठाकुर बांकेबिहारी श्वेत वस्त्र धारण कर हाथों में मुरली थामेंगे, तो भक्तों को द्वापर युग के महारास की अलौकिक छवि साकार होती नजर आएगी। साल में केवल एक बार होने वाले इस विशेष दर्शन के लिए वृंदावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
भक्तों को सुलभ दर्शन कराने के लिए मंदिर प्रबंधन ने सुबह और शाम के दर्शन समय में एक-एक घंटे की वृद्धि की है। रविवार को आराध्य मोर मुकुट, कटि-काछनी और श्वेत धवल पोशाक में मुरली बजाते हुए दर्शन दे रहे हैं।
साल में एक ही दिन श्वेत धवल पोशाक, महारास की मुद्रा में विराजेंगे आराध्य
ब्रज की मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वंशीवट पर गोपियों के साथ महारास रचाया था। मुरली की मधुर तान पर पूरा ब्रज भावविभोर हो उठा था। इसी महारास की स्मृति में ठाकुर बांकेबिहारी वर्ष में एक दिन मुरली धारण कर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस दिन आराध्य का मनोहारी शृंगार और महारास की मुद्रा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।
देश-विदेश से वृंदावन पहुंचते हैं श्रद्धालु
मंदिर सेवायत श्रीनाथ गोस्वामी ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी श्वेतांबर धारण कर मुरली बजाते हुए भक्तों को दर्शन देते हैं। मंदिर के जगमोहन में दिव्य सिंहासन पर विराजमान आराध्य के दर्शन चंद्रमा की धवल चांदनी के बीच विशेष अनुभूति कराएंगे। इस दुर्लभ झांकी के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने गेट संख्या एक के बाहर भी गुल्लक स्थापित कराई है। इससे मंदिर के अंदर भीड़ के बीच चढ़ावा अर्पित करने में परेशानी महसूस करने वाले भक्त बाहर ही अपनी श्रद्धा के अनुसार दान कर सकेंगे।
दो घंटे बढ़ाया दर्शन का समय
मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के सेवायत सदस्य हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए दर्शन का समय बढ़ाया गया है। रविवार सुबह 7:45 बजे मंदिर के पट खुलकर दोपहर एक बजे बंद होंगे। पहले सुबह के दर्शन दोपहर 12 बजे तक होते थे। इसी तरह शाम को 5:30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे और रात 10:30 बजे बंद होंगे, जो साढ़े नौ बजे तक होते थे।
