पद्मश्री लेने दिल्ली नहीं गए रमेश बाबा, सम्मान खुद चलकर आया बरसाना; ब्रज प्रेम में अडिग थे संत
संत रमेश बाबा ने ब्रज की सीमा न छोड़ने के अपने संकल्प के कारण 2019 में पद्मश्री सम्मान लेने दिल्ली ...और पढ़ें

गांव मानपुर स्थित रस मंडल पर अंतिम दर्शनों को रखे रमेश बाबा के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पण कर नमन करते डीएम सीपी सिंह, एसएसपी श्लोक कुमार व अन्य। फोटो सौ. मंदिर प्रबंधन द्वारा
HighLights
संत रमेश बाबा ने ब्रज न छोड़ने का संकल्प लिया था
पद्मश्री सम्मान लेने दिल्ली नहीं गए, बरसाना में मिला
गोसेवा, पर्यावरण संरक्षण और ब्रज संस्कृति में योगदान
संवाद सूत्र, बरसाना : राष्ट्र का प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान मिला, लेकिन उसे लेने संत रमेश बाबा दिल्ली नहीं गए। वजह थी उनका संकल्प, ब्रज की सीमा से बाहर नहीं जाना। लिहाजा सम्मान पाने के लिए बाबा राष्ट्रपति भवन नहीं पहुंचे, बल्कि पद्मश्री ही बरसाना की धरती पर उनके पास पहुंचा।
वर्ष 2019 में संत रमेश बाबा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। ब्रज की पौराणिक पहाड़ियों और पर्यावरण के संरक्षण, गोसेवा, प्राचीन कुंडों के संरक्षण तथा ब्रज की संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा के लिए उनके दशकों के योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया।
ब्रज की सीमा से बाहर न जाने के संकल्प पर अडिग रहे संत
सम्मान समारोह में राष्ट्रपति भवन में उनकी ओर से प्रतिनिधि ने पद्मश्री ग्रहण किया। बाद में सम्मान का प्रमाणपत्र, बैज और पटुका लेकर प्रतिनिधि बरसाना पहुंचे और बाबा को सौंपा। यह दृश्य बाबा के उस संकल्प का जीवंत उदाहरण बन गया, जिसमें उन्होंने ब्रज की धूल छोड़कर कहीं और न जाने का प्रण लिया था।
गोसेवा, पर्यावरण और ब्रज संरक्षण में योगदान के लिए मिला था पद्मश्री
देश ने पद्मश्री देकर उनके तप और सेवा को नमन किया, तो बाबा ने दिल्ली न जाकर बता दिया कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान पद्मश्री नहीं, बल्कि ब्रज की रज और राधारानी की सेवा थी।
