यमुना किनारे साधना करने निकले संत प्रेमानंद, गुलाबी सर्दी में ओढ़ा पीला अंगवस्त्र
संत प्रेमानंद काफी समय बाद यमुना विहार आश्रम से निकलकर यमुना किनारे साधना करने पहुंचे। उनके दर्शन पाकर भक्तों ने ...और पढ़ें
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यमुना किनारे मंगलवार सुबह भ्रमण को निकले संत प्रेमानंद।
HighLights
संत प्रेमानंद काफी समय बाद भ्रमण पर निकले।
भक्तों ने दूर से ही उनके दर्शन कर जयकारे लगाए।
संवाद सहयोगी, वृंदावन। यमुना पार एकांतवास में रहकर साधना कर रहे संत प्रेमानंद काफी समय बाद मंगलवार सुबह यमुना विहार आश्रम से भ्रमण के लिए निकले और यमुना किनारे बैठकर एकांत में साधना की। इस दौरान यमुना के दूसरे छोर पर कार्तिक नियम सेवा करने वाले भक्त जो कि यमुना स्नान अथवा पूजन कर रहे थे, उनकी नजर संत प्रेमानंद पर पड़ी तो राधा राधा के जयकारे शुरू हो गए।
संत प्रेमानंद श्रीराधा केलिकुंज छोड़ने के बाद से यमुना पार जहांगीरपुर में नए आश्रम यमुना विहार आश्रम में रहकर एकांतवास कर रहे हैं। समय-समय पर वह श्रीराधा केलिकुंज पहुंचते हैं तो संत प्रेमानंद के दर्शन को भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। हालांकि राधा केलिकुंज पर नियमित साधक पहुंचकर संकीर्तन व सेवा करते हैं। लेकिन, उन्हें अब पहले की तरह हर दिन संत प्रेमानंद के दर्शन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ऐसे में भक्तों की इच्छा है कि जल्द संत प्रेमानंद फिर से पदयात्रा अथवा एकांतिक दर्शन शुरू करें, ताकि उन्हें संत के हर दिन दर्शन हो सकें। यमुना पार एकांतवास कर रहे संत प्रेमानंद के अब हर दिन दर्शन नहीं हाे रहे। लेकिन, कार्तिक के महीने में मंगलवार सुबह लगभग पांच बजे संत प्रेमानंद अपने शिष्यों के साथ यमुना किनारे भ्रमण करने के लिए निकले।
कुछ दूर तक पैदल चलकर यमुना किनारे पहुंचे संत प्रेमानंद ने लगभग आधा घंटे बैठकर साधना की और फिर अपने नए आश्रम यमुना विहार आश्रम में पहुंचे। ऐसे में यमुना के दूसरे छोर पर वृंदावन की ओर से श्रद्धालुओं ने संत प्रेमानंद के दर्शन किए तो वे उनके समीप पहुंचने को उतावले हुए, कुछ श्रद्धालु मोटरबोट से यमुना पार पहुंचने में सफल भी हुए। लेकिन, वे संत के समीप तक नहीं पहुंच सके।