विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

संत प्रेमानंद: कभी राधे-राधे से गूंजती थीं वृंदावन की राहें रातभर, अब बाजार दिन में भी हो गया सूना

By Vipin Parashar Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 01 Oct 2026 02:06 PM (IST)

संत प्रेमानंद के श्रीराधा केलिकुंज छोड़ने के बाद वृंदावन की सड़कें और बाजार सूने हो गए हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही ...और पढ़ें

संत प्रेमानंद की पदयात्रा वाला मार्ग अब वीरान सा रहने लगा है।

संत प्रेमानंद की पदयात्रा वाला मार्ग अब वीरान सा रहने लगा है।

संवाद सहयोगी, वृंदावन। कभी आधी रात तक राधे-राधे के जयघोष से गूंजती सड़कें, संत प्रेमानंद की एक झलक पाने को उमड़ते श्रद्धालु और पदयात्रा मार्ग के दोनों ओर देर रात तक चलती चाय-नाश्ते की दुकानें...श्रीराधा केलिकुंज के आसपास का यह नजारा अब बीते दिनों की तस्वीर बन गया है।

18 मई को संत प्रेमानंद के श्रीराधा केलिकुंज छोड़ने के बाद नियमित पदयात्रा, एकांतिक दर्शन और वार्ता स्थगित है। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही कम हुई तो इसका असर सीधे स्थानीय कारोबार पर भी पड़ा। कभी ग्राहकों से घिरी रहने वाली दुकानों पर अब दुकानदार एक-एक ग्राहक की राह देखते हैं।

संत प्रेमानंद रात्रिकालीन पदयात्रा के साथ सुबह एकांतिक दर्शन और वार्ता के लिए भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहे हैं। उनकी पदयात्रा के दौरान सौभरिवन और श्रीराधा केलिकुंज के आसपास रातभर भक्तों की भीड़ जुटती थी। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु घंटों इंतजार कर संत की एक झलक पाने की कोशिश करते थे। इसी भीड़ ने आसपास के क्षेत्र को छोटे-बड़े कारोबार का केंद्र बना दिया था।

18 मई को श्रीराधा केलिकुंज छोड़ने के बाद आश्रम की ओर से सूचना जारी की गई कि स्वास्थ्य कारणों से संत एकांतवास में रहेंगे। बाद में यमुनापार जहांगीरपुर में यमुना विहार आश्रम की स्थापना हुई और गुरुपूर्णिमा का पांच दिवसीय उत्सव भी वहीं हुआ। हालांकि संत महीने में एक बार श्रीराधा केलिकुंज आते हैं, लेकिन नियमित पदयात्रा और दर्शन न होने से पहले जैसी चहल-पहल दिखाई नहीं देती।

भीड़ के साथ बढ़ा किराया, अब निकालना मुश्किल

श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी तो आसपास खान-पान और संत के चित्रों से जुड़ी सामग्री के स्टॉल भी बढ़ गए। दूसरे प्रदेशों से लोग यहां कारोबार करने पहुंचे। कारोबार बढ़ता देख कुछ दुकानों के किराये में भी वृद्धि हुई। अब भीड़ घटने के बाद दुकानदारों के सामने बढ़े किराये की भरपाई करना चुनौती बन गया है।

आश्रम के पास नाश्ते की ठेल लगाने वाले महेंद्रपाल बताते हैं कि पहले बिक्री अच्छी होती थी, लेकिन अब दिनभर में सौ रुपये की बिक्री भी मुश्किल से हो रही है। चाय-नाश्ता और बिस्किट बेचने वाले रिंकू यादव कहते हैं कि भीड़ के समय दुकान का किराया बढ़कर 30 हजार रुपये हो गया था। अब यह किराया निकालना मुश्किल हो गया है।

यह भी पढ़ें- संत प्रेमानंद के आश्रम में ड्रेस कोड में बदलाव, अब हर साधक नहीं पहन पाएगा पीले रंग का अचला