मथुरा: गायों के लिए 'नंदबाबा'' थे रमेश बाबा, 60 हजार गोवंशी का बसा दिया संसार; गोशाला में ही होगा अंतिम संस्कार
बरसाना में गोसेवा के लिए 'नंदबाबा' के नाम से प्रसिद्ध संत रमेश बाबा का निधन हो गया है। उनकी माताजी ...और पढ़ें

रमेश बाबा की गोशाला में मौजूद गोवंश।
रसिक शर्मा, गोवर्धन (मथुरा)। राधारानी की नगरी बरसाना में एक संत की विदाई हुई है, लेकिन उनकी गोसेवा की कहानी हजारों गोवंशी की सांसों में जीवित रहेगी। रमेश बाबा ने जिस सेवा की शुरुआत महज दो गायों से की थी, वह आज 60 हजार से अधिक गोवंशी के विशाल आश्रय में बदल चुकी है।
बेसहारा गाय से लेकर घायल और बीमार गोवंशी तक, जिसे कहीं ठौर नहीं मिला, उसके लिए माताजी गोशाला के द्वार खुले रहे। इसी कारण बरसाना में रमेश बाबा की पहचान संत के साथ-साथ गोवंश के ‘नंदबाबा’ के रूप में भी बनी।
सात जुलाई 2007 को सड़क पर मिली दो गायों से माताजी गोशाला की शुरुआत हुई। बाबा ने इन दोनों गायों की सेवा को ही अपना संकल्प बना लिया। धीरे-धीरे सेवा का यह दायरा बढ़ता गया और गोशाला में बेसहारा गोवंश आने लगा। देखते ही देखते दो गायों से शुरू हुआ यह कारवां हजारों गोवंश तक पहुंच गया। आज करीब 170 एकड़ में फैली गोशाला में 60 हजार से अधिक गोवंशी की सेवा की जा रही है।
चारा ही नहीं, इलाज और आश्रय भी
गोशाला में 58 शेड बनाए गए हैं। चारे के भंडारण के लिए सात बड़े गोदाम हैं, जिनमें करीब 15 हजार टन चारा रखने की क्षमता है। नवजात बछड़ों से लेकर बूढ़ी, बीमार और घायल गायों तक की देखभाल के लिए अलग व्यवस्था है। सड़क पर घायल मिले गोवंश को उपचार के बाद सुरक्षित आश्रय देने की व्यवस्था भी सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
गोबर से बिजली, सेवा में आत्मनिर्भरता
रमेश बाबा की गोसेवा केवल आश्रय तक सीमित नहीं रही। गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर से बायोगैस और बिजली उत्पादन की व्यवस्था की गई। चारा पहुंचाने और गोशाला की व्यवस्था संभालने के लिए ट्रैक्टर, जेसीबी और लोडर लगाए गए।
श्रीमाता जी गोशाला में अंतिम संस्कार
ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा के गोलोक वास के चलते उनका पार्थिव शरीर मानपुर स्थित रस मंडप में रखा गया है। बुधवार को संत रमेश बाबा का अंतिम संस्कार श्रीमाता जी गोशाला में होगा। बाबा के अंतिम संस्कार से पहले उनका डोला निकलेगा मानपुर से बरसाना, चिकसोली होते हुए श्रीमाता जी गोशाला जाएगा।
अंतिम दर्शन को करीब 10 हजार से अधिक अनुयायियों के पहुंचने की उम्मीद है। मान मंदिर के सचिव सुनील सिंह ने बताया कि बाबा का कहना था कि जब भी उनका समय पूरा हो तो उनका अंतिम संस्कार यही पर हो। पहले गहवरवन में अंतिम संस्कार किया जाना तय हुआ था, लेकिन बाद अनुयायियों की भीड़ को देख निर्णय लिया गया है कि उनका अंतिम संस्कार बाबा तो स्थापित श्रीमाता जी गोशाला में होगा।
