जिस बरसाना में नाक रगड़कर मांगी थी माफी, वहां प्रदीप मिश्रा की कथा में हर-हर महादेव की गूंज
बरसाना में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और भक्तिमय ...और पढ़ें

प्रदीप मिश्रा कथा करते हुए और दूसरे चित्र में दंडवत होने के दौरान जो फाइल है।
HighLights
पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा बरसाना में शुरू
कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भक्तिमय माहौल
आस्था के साथ कर्म और प्रयास का महत्व बताया
संवाद सूत्र, बरसाना (मथुरा)। राधारानी की नगरी बरसाना में सोमवार को भक्ति और आस्था का ऐसा रंग चढ़ा कि चारों ओर बस राधे-राधे और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई देते रहे। प्रेम सरोवर के समीप गाजीपुर गांव के विशाल मैदान में शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ तो कथा के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा से शिव महापुराण सुनने के लिए कई जिलों के श्रद्धालु पहुंचे। कथा के दौरान सजी ईशा-गौर की मनोहारी झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
बरसाना की महिमा का किया बखान
कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा ने बरसाना की महिमा का बखान करते हुए कहा कि यह केवल एक नगरी नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति की पवित्र भूमि है। यहां राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की अनुभूति होती है। ऐसी पावन धरा पर भगवान भोलेनाथ की कथा सुनना स्वयं में विशेष आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने राधारानी और अष्टसखियों की गाथा के माध्यम से प्रेम में समर्पण, सेवा और माधुर्य का संदेश दिया।
भगवान शिव के प्रति आस्था से जुड़े प्रसंग के दौरान उन्होंने एक परिवार को मंच पर बुलाया। परिवार ने बताया कि शिव पर विश्वास रखते हुए उन्होंने निरंतर प्रयास जारी रखा और उनके तीन बेटों को सरकारी नौकरी मिली।
आस्था के साथ कर्म और प्रयास से किया जागरूक
इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं से कहा कि आस्था के साथ कर्म और प्रयास भी जरूरी है। विश्वास मनुष्य को संबल देता है, लेकिन सफलता के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। पितृपक्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूर्वजों की स्मृति को सद्कार्यों से जोड़ने का संदेश दिया।
पितरों के दान-पुण्य के साथ करें जरूरतमंंदों की सेवा
प्रदीप मिश्रा ने कहा कि पितरों के निमित्त दान-पुण्य करने के साथ जरूरतमंदों की सेवा और समाजहित के कार्य भी किए जाने चाहिए। महाभारत के अरावन देवता के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने किन्नर समाज की धार्मिक आस्था का उल्लेख किया। बताया कि अरावन को अर्जुन और उलूपी का पुत्र माना जाता है और दक्षिण भारत में उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराएं प्रचलित हैं।
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लगेगा अतिरिक्त पंडाल
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए विठलेश सेवा समिति ने अतिरिक्त पंडाल लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। बैठने और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि कथा के आगामी दिनों में भक्तों को सुविधा मिल सके।
