गगन राव पाटिल, मथुरा: मुजफ्फर नगर की लता आज बेहद खुश हैं, ये खुशी न केवल चेहरे पर दिखी बल्कि आंखों के रास्ते भी झांकने लगी। प्लास्टिक कचरा बीनकर जिदगी की गाड़ी चलाने वाली लता ने सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रधानमंत्री से कभी बात होगी।

प्रधानमंत्री जब सामने आये और सवाल पूछने लगे, तो ठिठक सी गईं। एक बार सोचा सपना है, फिर पीएम के सवालों का बेबाकी से जवाब भी दिया। जैसे ही पीएम गए, सबसे पहले फोन पर परिजनों से खुशी साझा की। खुशी इस बात की जिन पीएम से मिलने का सपना भी न आया, तो वह खुद सामने थे।

दरअसल मुजफ्फरनगर की लता, पिकी, कैला और लीला ये वह महिलाएं हैं जिनकी दिनचर्या ही कचरा बीनने से शुरू होती है। सुबह कचरा बीनना और फिर उससे प्लास्टिक कचरा अलग करना। बिक्री से जो पैसा मिलता, उसी से परिवार पलता है। बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी वेटेरिनरी यूनिवर्सिटी में नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम का शुभारंभ करने आए थे। उन्होंने मेला स्थल स्थित प्लास्टिक छटाई केंद्र का दौरा किया। मुजफ्फरपुर, मथुरा आदि शहरों से कूड़ा बीनने वाली कई महिलाएं यहां पहुंचीं। इन महिलाओं से प्रधानमंत्री ने कूड़ा निस्तारण की जानकारी की। पूछा कैसे अलग करते हैं। प्लांट तक कैसे ले जाते हैं, क्या दिक्कत आती है। इसके बाद मथुरा की प्रभा, समीला और सुनीता से भी जानकारी ली। उनसे पूछा कि कितने रुपये कमा लेती हो? बच्चों की शिक्षा के बारे में पूछा कि बच्चे स्कूल जाते हैं कि नहीं? इस पर महिलाओं ने बताया कि बच्चों को रोजाना स्कूल भेजते हैं। उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाना ही मकसद है। इसलिए वे खुद भी काम करती हैं। शहर को कचरा मुक्त करना उन्हें अच्छा भी लगता है और मकसद भी है। पीएम से पहली बार मिल रही महिलाओं ने बताया कि उनसे मिलना काफी अच्छा लगा। उम्मीद नहीं थी देश की इतनी बड़ी शख्सियत उनसे आकर उनका हाल-चाल लेगी। कहती हैं कि ये पल जिदगी में संजो लिए हैं।

Posted By: Jagran

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