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बकरी ही नहीं, ऊंटनी-गधी का दूध भी बीमारियों के लिए रामबाण, पोषण क्रांति में नई उम्मीद, लागू होगी विशेष योजना

Published: Sat, 26 Sep 2026 06:39 PM (IST)

बकरी के साथ ऊंटनी, गधी और भेड़ का दूध भी कई बीमारियों के लिए रामबाण साबित हुआ है, जिसमें ए-टू बीटा-कैसिन प्रोटीन पाया जाता है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. बकरी, ऊंटनी, गधी, भेड़ का दूध बीमारियों में लाभकारी।

  2. इनके दूध में ए-टू बीटा-कैसिन प्रोटीन होता है।

  3. मथुरा में गैर-गोवंशीय दूध पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित।

विवेक राजपूत, मथुरा। बकरी ही नहीं, ऊंटनी, गधी एवं भेड़ का दूध भी कई बीमारियों के लिए रामबाण है। गाय, भैंस के दूध में ए-वन एवं ए-टू प्रोटीन पाया जाता है, जबकि इनके दूध में ए-टू बीटा कैसिन प्रोटीन ही पाया जाता है। इसके कारण यह पाचक तो होता ही है, साथ ही फैट की मात्रा भी बहुत कम होती है।

गधी का दूध त्वचा रोग एवं ऊंटनी का दूध मानसिक संबंधी बीमारी में कारगर होता है। कई स्तर पर हुए शोध के बाद ये बात साबित होने के बाद केंद्रीय बकरी अनुसंधान में इनकी प्रजाति संरक्षित करने एवं लोगों को इन्हें पालने के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित हो रही है।

इनके दूध की बिक्री के लिए विशेष कीमत निर्धारित करने के साथ पालन के लिए विशेष योजना लागू करने के लिए भारत सरकार से मांग की जाएगी। भारत में 250 मिलियन टन दूध की उपलब्धता है। इसके अनुसार मात्र 485 ग्राम दूध प्रति व्यक्ति के हिसाब से ही मिल पाता है। सरकार अब पोषण क्रांति पर जोर दे रही है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कारगर

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक मनीष कुमार चेटली ने जागरण को बताया कि मां के बाद बकरी के दूध में सर्वोत्तम पाचन शक्ति पाई जाती है। बकरी का दूध डेंगू बीमारी जल्द सही करने में उपयोगी एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी कारगर पाया गया है।

भारत सरकार अब गैर गोवंशीय अन्य पशु जिनके दूध में प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई जाती है एवं उनका दूध बीमारी सही करने में कारगर साबित हो रहा है, इनको संरक्षित कर इनके पालन को बढ़ावा देने जा रही है। उन्होंने बताया, अब तक कई स्तर पर हुए शोध से यह साबित हुआ है कि बकरी की तरह गधी, ऊंटनी एवं भेड़ के दूध में ए-टू बीटा कैसिन प्रोटीन पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

विशेष योजना लागू करने के लिए भेजा जाएगा पत्र

गधी का दूध त्वचा रोग सही करने एवं कॉस्मेटिक सामान बनाने के काम आता है। वहीं ऊंटनी का दूध मानसिक बीमारी सही करने एवं डायबिटीज रोगी की दवा आधी करने के लिए रामबाण साबित हुआ है। इनके दूध में फैट की मात्रा एक प्रतिशत के आसपास ही है और पोषक तत्व अधिक हैं।

वहीं, बकरी व भेड़ के दूध में फैट 21 प्रतिशत पाया जाता है। इसके हिसाब से डेरी पर इनका दूध 17 रुपये प्रति लीटर ही खरीदा जाता है। इसके लिए भारत सरकार को इनके पालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना लागू करने तथा दूध की बिक्री के लिए विशेष कीमत निर्धारित करने के लिए पत्र भेजा जाएगा। इससे इनकी प्रजाति संरक्षित होगी और लोग इनका पालन कर आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकेंगे।

केंद्रीय बकरी अनुसंधान में राष्ट्रीय कार्यशाला आज

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम में शुक्रवार की सुबह 9.30 बजे राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित होगी। इसमें गुजरात, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के करीब 20 विज्ञानी तथा इस क्षेत्र से जुड़े आठ प्रमुख लोग भी शामिल होंगे। अमूल डेरी के प्रबंध निदेशक भी कार्यशाला से आनलाइन जुड़ेंगे।

भारत में गैर-गोवंशीय दूध की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य की संभावनाओं पर मंथन किया जाएगा। केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र नीति अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में किसानों की आजीविका में सुधार के लिए गैर-गोवंशीय दूध की मूल्य शृंखला पर निर्णय लिए जाएंगे।

पौष्टिक, विशिष्ट एवं कार्यात्मक दूध उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण बकरी, भेड़, ऊंट एवं अन्य गैर गोवंशी के दूध उत्पादन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की नई संभावना पर भी मंथन होगा। इनके दूध से क्या उत्पाद बनाए जा सकेंगे, उनका क्या लाभ होगा, की जानकारी भी दी जाएगी।

कार्यशाला में वैज्ञानिकों, नीति-निर्माता, सरकारी विभागों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी संस्थाओं, उद्यमियों, स्टार्ट-अप, निजी क्षेत्र, गैर-सरकारी संगठनों, वित्तीय संस्थानों, विकास एजेंसियों तथा किसान भी बुलाए गए हैं। तकनीकी सत्र में विशेषज्ञ विचार प्रस्तुत करेंगे, जिन पर चर्चा होगी। कार्ययोजना बनेगी एवं रोडमैप तैयार हाेगा।

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