वृंदावन का कात्यायनी पीठ: जहां गिरे थे मां के केश, पीठों में सिद्धपीठ है कात्यायनी मंदिर; मान्यता
वृंदावन का कात्यायनी पीठ एक सिद्धपीठ है, जहां मां के केश गिरे थे। स्वामी केशवानंद द्वारा 1923 में पुनर्स्थापित यह ...और पढ़ें

वृंदावन का कात्यायनी पीठ।
HighLights
कात्यायनी पीठ 108 अज्ञात व 51 ज्ञात पीठों में सिद्धपीठ।
स्वामी केशवानंद ने 1923 में मंदिर का वैदिक रीति से पुनरुद्धार किया।
विवाह में विलंब वाली कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है।
जागरण संवाददाता, वृंदावन। कात्यायनी पीठ भारतवर्ष के उन अज्ञात 108 एवं ज्ञात 51 पीठों में से एक सिद्धपीठ है, यहां मां के केश गिरे थे। कात्यायनी पीठ का पुनरुद्धार कामरूम पीठ के स्वामी रामानंद तीर्थ से दीक्षित होने के बाद हिमालय की कंदराओं में कठोर साधना करने के बाद मां के आदेश पर ही स्वामी केशवानंद ने एक फरवरी 1923 माघी पूर्णिमा के दिन वैदिक याज्ञिक आचार्यों की ओर से वैष्णवीय परंपरा से मंदिर की प्रतिष्ठा करवाई।
मान्यता है कि ब्रजगोपियों ने द्वापर में अगहन माह में बालू से मां कात्यायनी की प्रतिमा बनाकर एक महीने व्रत रखा और भगवान श्रीकृष्ण को वर के रूप में प्राप्त करने की कामना की, गोपियों की पूजा से प्रसन्न होकर मां कात्यायनी ने उन्हें वरदान दिया, लेकिन, श्रीकृष्ण तो एक ही थे और गोपियां अनेक। ऐसे में उन्होंने मां के वरदान का मान रखने के लिए ही वंशीवट पर गोपियों संग महारास किया, जिसमें श्रीकृष्ण ने हर गोपी के साथ अलग अलग वर रूप में नृत्य कर मां कात्यायनी के वरदान को शाश्वत किया।
इसका उल्लेख श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के 22 वें अध्याय में किया गया है। कात्यायनि महामाये, महायोगिन्यधीश्वरि। नंदगोपसुतं देवि पतिं मे करू ते नम:।।

मंदिर का गेट।
ये है मंदिर की मान्यता
इसी के बाद मान्यता है कि जिस कन्या के विवाह में विलंब होता है। वह कन्या मां के स्वरूप का ध्यान रखकर उक्त मंत्र की एक माला प्रतिदिन जाप करे, तो उसे सुंदर और मनोकूल वर की प्राप्ति होती है। आज भी सैकड़ों युवतियां मां की पूजा कर सुखी गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रही हैं।
वास्तुकला
मंदिर में पंचानन शिव, विष्णु, सूर्य, गणेजी के विग्रह स्थापित हैं। राधाबाग मंदिर परिसर में गुरु मंदिर, शंकराचार्य मंदिर, शिव मंदिर, सरस्वती मंदिर के अलावा बगीचा में अर्द्धनारीश्वर गौरीशंकर के एक प्राण दो देह को धारण किए विराजमान हैं।
