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मथुरा यमुना नेचर वॉक परियोजना एनओसी के फेर में फंसी, 24.29 करोड़ रुपये का काम रुका

Published: Tue, 06 Oct 2026 07:38 AM (GMT+05:30)

मथुरा में यमुना किनारे 24.29 करोड़ रुपये का नेचर वॉक प्रोजेक्ट छावनी परिषद से एनओसी न मिलने के कारण अटका ...और पढ़ें

यमुना किनारे श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए इस तरह का बनाया जाना है रमणीक स्थल। फोटो-जागरण आर्काइव

यमुना किनारे श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए इस तरह का बनाया जाना है रमणीक स्थल। फोटो-जागरण आर्काइव

HighLights

  1. यमुना किनारे 2.5 किमी लंबा नेचर वॉक प्रोजेक्ट प्रस्तावित है।

  2. 24.29 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट एनओसी के कारण अटका हुआ है।

  3. शासन ने पहली किस्त जारी की, पर काम छह माह से रुका।

जागरण संवाददाता, मथुरा। कान्हा की नगरी में यमुना किनारे करीब ढाई किमी लंबा नेचर वाक बनाए जाने का कार्य एनओसी के फेर में फंसकर अटक गया है। छह माह में भी इस काम के लिए छावनी परिषद द्वारा एनओसी नहीं दी जा सकी है। इसके कारण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है, जबकि शासन इसके लिए मंजूरी दे चुका है। प्रथम किस्त भी जारी कर दी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कान्हा की नगरी में द्वापर युग जीवंत कर रहे हैं। पिछले वर्ष जल निगम सी एंड डीएस ने मथुरा ब्लॉक के समीप नीमबाड़ी से बंगाली घाट तक यमुना किनारा ईको पर्यटन के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना बनाई।

जल निगम सी एंड डीएस ने छह माह पूर्व छावनी परिषद को एनओसी के लिए भेजा पत्र

कुल 24.29 करोड़ रुपये की इस परियोजना को शासन ने मार्च, 2026 में मंजूरी देते हुए प्रथम किस्त के रूप में 12.14 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए। इसके तहत यमुना किनारे पांच मीटर चौड़ा नेचर वाक बनाया जाएगा। यमुना किनारे पत्थरों की फेंसिंग लगाई जाएगी, ताकि बाढ़ आने पर ये प्रभावित न हो। दो मीटर की ग्रीन बेल्ट बननी है, जिसमें देशज प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे। श्रद्धालुओं के आराम के लिए ब्रेंच बनाई जाएंगी। पूरे वॉकवे में सोलर लाइटों को लगवाया जाएगा। एक बायो टॉयलेट, हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार होना है। बंगाली घाट आकर्षक होगा।

आंकड़ों के हिसाब से

  • 12.14 करोड़ रुपये शासन ने अप्रैल में मंजूरी के साथ किए थे जारी
  • 7.35 करोड़ रुपये से बंगाली घाट किया जाना है विकसित
  • 1.20 करोड़ रुपये से पार्किंग एवं एप्रोच रोड बनना है

अब तक नहीं मिल सकी स्वीकृति

जल निगम ने अप्रैल में टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद काम शुरू कराने के लिए छावनी परिषद से एनओसी देने के लिए पत्र भेजा। कई बार इस संबंध में छावनी अधिकारियों से भी संपर्क किया गया, मगर आश्वासन ही मिला है। छह माह में भी एनओसी न मिलने के कारण अधिकारी असमंजस में हैं। एनओसी में देरी की वजह से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। सुरक्षा कारण की वजह से एनओसी में देरी हो रही है। जल निगम सी एंड डीएस के परियोजना प्रबंधक एम कपिल ने बताया, एनओसी मिलने के बाद ये काम शुरू कराया जाएगा।

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