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'दंगल' जैसी सच्ची कहानी, मथुरा की नीलम ने दी कजाकिस्तान में धुरंधरों को पटखनी; सेकेंड वर्ल्ड चैंपियन

By Ved Prakash Gautam Edited By: Prateek Gupta
Published: Mon, 02 Nov 2026 09:18 PM (IST)

मथुरा की नीलम सिरोही ने अस्ताना में आयोजित सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 के 50 किलोग्राम भार वर्ग में रजत ...और पढ़ें

कजाकिस्तान में दांव पेंच आजमातीं मथुरा की पहलवान नीलम।

कजाकिस्तान में दांव पेंच आजमातीं मथुरा की पहलवान नीलम।

HighLights

  1. नीलम सिरोही ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।

  2. अस्ताना, कजाकिस्तान में 50 किलोग्राम भार वर्ग में उपलब्धि हासिल की।

जागरण संवाददाता, मथुरा। इरादे फौलादी हों और सीने में कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो रूढ़ियों की हर जंजीर टूट जाया करती है। ब्रज की लाडली नीलम सिरोही ने अस्ताना (कजाकिस्तान) में आयोजित कुश्ती की सबसे बड़ी वैश्विक प्रतियोगिता सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2026 के 50 किलोग्राम भार वर्ग में बुधवार को रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया है।

पहले सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की पहलवान जिनित बयानों बा को हराकर नीलम ने फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में जापान की सुसाकी से हार गईं, लेकिन उप विजेता का खिताब हासिल कर लिया। जिले के बाटी क्षेत्र स्थित गांव फेंचरी की रहने वाली नीलम के विश्व उपविजेता बनने की कहानी किसी फिल्मी दास्तान से कम नहीं है।

वर्ष 2007-08 में महज चार-पांच साल की उम्र में नीलम पढ़ने के लिए अपने फूफा व जिला कुश्ती संघ के सचिव जनार्दन सिंह पहलवान के पास शहर आ गई थीं। जनार्दन पहलवान बताते हैं कि नीलम पढ़ाई में सामान्य थीं, लेकिन कालाेनी के बच्चों के साथ खेलते वक्त सड़क किनारे मिट्टी में लड़कों को भी अपनी फुर्ती से पटकनी दे दिया करती थीं।

जनार्दन पहलवान की पारखी नजरों ने नीलम के भीतर एक अंतरराष्ट्रीय पहलवान की झलक देख ली। जनार्दन पहलवान ने घर के बरामदे में गद्दे बिछाकर नीलम को दांव-पेच सिखाने शुरू कर दिए। सुबह जल्द उठकर कड़ा अभ्यास, खुराक में बादाम और दिन-रात का पसीना नीलम की दिनचर्या बन गया। वर्ष 2015-16 से उन्होंने पेशेवर रूप से अखाड़े में उतरना शुरू किया।

कुश्ती के लिए सहा अपनों का विरोध

एक दौर वह भी था जब नीलम के अखाड़े में उतरने का समाज ही नहीं, बल्कि अपनों ने भी पुरजोर विरोध किया। गोरखपुर में जब नीलम पहली बार यूपी स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर फेंचरी गांव पहुंचीं, तो स्टेशन से गांव तक स्वागत के दौरान कई बुजुर्गों, स्वजन और रिश्तेदारों ने यह कहकर विरोध जताया कि कुश्ती लड़ना लड़कियों का काम नहीं है।

जनार्दन ने नीलम का हौसला बांधा। नीलम ने 2017 में एथेंस में आयोजित अंडर-15 वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर आलोचकों को करारा जवाब दिया।

एक कामयाबी ने बदल दी गांव की तस्वीर

नीलम की कामयाबी ने गांव में सोच बदली। फेंचरी गांव पहलवानों की नर्सरी बन चुका है, जहां 15 से 20 लड़के-लड़कियां अखाड़े में पसीना बहा रहे हैं। नीलम से प्रेरणा लेकर उनकी बहन चंचल, अर्चना (राष्ट्रीय कांस्य पदक विजेता) सहित कई युवाओं ने सेना और वायुसेना में खेल कोटे से जगह बनाई है। वर्तमान में रेलवे में गार्ड हैं।

होगा भव्य अभिनंदन

विश्व चैंपियनशिप में उपविजेता बनने के बाद नीलम सिरोही एक नवंबर की रात करीब एक बजे दिल्ली के आइजीआइ हवाई अड्डे पर पहुंचेंगी। इसके बाद कोसीकलां, चौमुहां, छटीकरा और मथुरा में गुरु मोहन श्याम कुश्ती एकेडमी के पहलवान ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत करेंगे।

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