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मथुरा में कृष्णकालीन पौधे दिलाएंगे 'द्वापर युग' की याद, 40 हजार पौधों से लहलहाएगी हरियाली

Published: Mon, 12 Oct 2026 04:54 PM (IST)

मथुरा में सामाजिक वानिकी प्रभाग ने 42 हेक्टेयर भूमि पर 40 हजार से अधिक कृष्णकालीन और औषधीय पौधे लगाए हैं।

40 हजार पौधों से लहलहाएगी हरियाली।

40 हजार पौधों से लहलहाएगी हरियाली।

HighLights

  1. मथुरा में 42 हेक्टेयर पर 40 हजार से अधिक पौधे रोपे।

  2. बीएसएफ भूमि पर छह कृष्णकालीन वाटिकाएं विकसित की गईं।

  3. जैव विविधता और कृष्णकालीन वनस्पतियों का संरक्षण होगा।

जागरण संवाददाता, मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण के समय ब्रज की धरती पर लहलहाने वाले वृक्षों और वनस्पतियों की विरासत अब नए सिरे से संजोई जा रही है। मथुरा में सामाजिक वानिकी प्रभाग ने इस बार 42 हेक्टेअर भूमि पर कुल 40 हजार से अधिक पौधे रोपे हैं।

इनमें खास पहल हाईवे किनारे बाद गांव स्थित बीएसएफ बटालियन की भूमि में की गई है, जहां 12 हेक्टेअर में छह विशेष वाटिकाएं विकसित की गई हैं। इन वाटिकाओं में कृष्णकालीन सहित 40 प्रजातियों के पौधे रोपे गए हैं।

जलवायु के अनुकूल इन पौधों को फर्रुखाबाद के कायमगंज से मंगाया गया है। जैव विविधता को समृद्ध करने वाली ये वाटिकाएं न केवल ब्रज की प्राकृतिक विरासत को सहेजेंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को कृष्णकालीन वनस्पतियों से परिचित कराने का माध्यम भी बनेंगी।

बीएसएफ की भूमि पर जैव विविधता क्षेत्र विकसित किया गया है। दो-दो हेक्टेअर की छह वाटिकाएं विकसित की हैं। इसके लिए बाकायदा करार किया गया है। यहां श्रीकृष्ण, औषधि, वंदे मारतम्, स्मृति, नक्षत्र, नवगृह एवं राशि वाटिका बनाई हैं। इनमें जलवायु के अनुकूल पौधे रोपे गए हैं।

कुल 7200 पौधे रोपित गए हैं। सभी की तार फेंसिंग कराई है। क्षेत्रीय वन अधिकारी अतुल तिवारी ने बताया, बीएसएफ परिसर की वाटिकाएं मंडल की पहली होंगी, जहां छह तरह की वाटिकाएं हैं। नक्षत्र वाटिका में सभी 27 नक्षत्र के पौधे रोपे गए हैं। इसी वाटिका में सभी राशि की प्रजाति के पौधे रोपे गए हैं। इसके अलावा यहां बीएसएफ वाटिका में जवानों ने अपने नाम से पौधे रोपे हैं।

वहीं बलिदानी वाटिका में बलिदानी के नाम से उनके स्वजन ने पौधे रोपे हैं श्रीकृष्ण वाटिका में श्रीकृष्ण की प्रिय प्रजाति टेर, कदंब, पीलू, पाकड़, बरगद आदि के पौधे रोपे हैं। औषधि वाटिका में नीम, अर्जुन, आंवला, बेल, पीपल, जामुन, अमलतास, कचनार, तुलसी, घृतकुमारी आदि पौधे रोपे गए हैं।

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वहीं जैव विविधता वाटिका में चिड़ियां, तितली आदि पक्षियों को आकर्षित करने संबंधी प्रजाति के पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने बताया, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान की 30 हेक्टेअर भूमि में 30 हजार पौधे रोपे हैं। यहां भी कुछ वाटिकाएं बनाई हैं। दोनों वाटिकाओं की देखभाल सामाजिक वानिकी विभाग द्वारा किया जा रहा है।

बीएसएफ की भूमि में जैव विविधता को लेकर विशेष वाटिकाएं बनाई हैं। यहां हर प्रजाति के पौधे रोपे गए हैं। ये मंडल की पहली वाटिका है। ये वाटिकाएं टीटीजेड में वसूली गई जुर्माना राशि से तैयार कराई हैं। वहीं केंद्रीय बकरी अनुसंधान की भूमि पर भी पौधारोपण कराया गया है।
-वेंकट श्रीकर पटेल, प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, मथुरा।