गीता स्तंभ पर कितने श्लोक हैं और क्या है इसका धार्मिक महत्व? मथुरा के बिरला मंदिर का इतिहास, जानें गीता मंदिर की खासियत
Mathura Gita Mandir: यह मंदिर जुगल किशोर बिड़ला द्वारा निर्मित है और यहाँ सुदर्शन चक्रधारी श्रीकृष्ण की आदमकद प्रतिमा भी स्थापित है, जहाँ गीता जयंती पर विशेष आयोजन होते हैं।

Mathura Gita Mandir: मथुरा का गीता मंदिर।
HighLights
गीता स्तंभ पर श्रीमद् भगवत गीता के स्पष्ट श्लोक उकेरे गए हैं
जुगल किशोर बिड़ला ने माता-पिता की स्मृति में मंदिर बनवाया
सुदर्शन चक्रधारी श्रीकृष्ण की आदमकद प्रतिमा मन को लुभाती है
अभिषेक सक्सेना, मथुरा। Mathura Gita Mandir, Gita Stambh पत्थर के गगनचुंबी स्तंभ पर उकरे श्रीमद् भगवत गीता के श्लोक और पत्थर के गीता रथ देखकर श्रद्धालुओं को अलग ही अनुभूति होती है। मथुरा की जिस पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया और यहां उनकी लीलाएं देखने को मिली। उसी ब्रज में एक अनोखा मंदिर भी है जहां के दर्शन करने दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं। गीता श्लोक और रथ के कारण इस मंदिर का नाम श्रीमद् भगवत गीता मंदिर रखा गया है। आइये जानते हैं इस लेख के जरिए मंदिर के बारे में...
श्रीकृष्ण की नगरी से जानने वाले शहर में हर रोज हजारों कृष्ण भक्त विभिन्न मंदिरों का दीदार करने पहुंचते हैं। ब्रज का यह एकमात्र मंदिर है जहां लोग पत्थर पर उकेरी श्रीमद् भगवत के श्लोकों के दर्शन कर खुद को धन्य समझते हैं।
बिड़ला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है ये मंदिर
मथुरा के गीता मंदिर को बिड़ला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के प्रवेश द्वार के खंभों पर भगवद गीता के 18 अध्याय गुदे हुए हैं। ये मंदिर लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। भगवान कृष्ण के साथ यहां नारायण, राम, देवी लक्ष्मी और सीता की पवित्र मूर्तियां भी आपको देखने को मिलेगी। मंदिर में लगी सुदर्शनचक्र धारी श्रीकृष्ण की प्रतिमा मन को लुभाने वाली है।

मंदिर का समय
मंदिर खुलने का समय
गर्मी का समय
- गर्मियों में मंदिर सुबह पांच बजे खुलता है और दोपहर 12 बजे बंद हो जाता है।
- उसके बाद दोपहर दो बजे से शाम आठ बजे तक मंदिर में दर्शन कर सकते हैं।
सर्दियों का समय
सर्दियों के मौसम में मंदिर का समय परिवर्तित हो जाता है, सुबह 07:30 बजे मंदिर खुलता है और 12 बजे बंद हो जाता है। दोपहर दो बजे से रात 08:30 बजे तक दर्शन कर सकते हैं।
ये है मंदिर की मान्यता
मान्यता है कि महाभारत में हुए युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा ली थी। एक समय ऐसा भी आया जब उनकी प्रतिज्ञा टूटते से बची थी, भगवान कृष्ण ने सुदर्शन चक्र को अपनी अंगुली पर धारण कर लिया था। हालांकि इसे चलाने की बारी नहीं आई थी।
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लुभाती है सुदर्शन चक्रधारी श्रीकृष्ण की आदमकद प्रतिमा
मथुरा-वृंदावन रोड पर सुदर्शन चक्रधारी श्रीकृष्ण की आदमकद प्रतिमा के दर्शन चित्त को लुभाते हैं। मंदिर के दाहिनी ओर विशालकाय पत्थर का स्तंभ है। इसी पर गीता के श्लोक उकेरे गए हैं। यह इतने स्पष्ट हैं कि एक-एक शब्द पढ़ा जा सकता है।
संवत 2002 में बना था मंदिर
मंदिर का निर्माण संवत 2002 में जुगल किशोर बिड़ला ने माता-पिता की स्मृति में कराया था। मंदिर को बने करीब 80 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। विशालकाय स्तंभ पर उकेरी गई गीता के कारण ही इस मंदिर का नाम श्रीमद् भगवत गीता मंदिर रखा गया। हालांकि प्रचलन में इसे बिड़ला मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां गीता जयंती पर विशेष आयोजन होता है।
ऐसे पहुंचे मंदिर
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से इस मंदिर की दूरी करीब तीन किलो मीटर दूर है। दिल्ली से यहां की दूरी करीब 155 से 160 किलोमीटर है। करीब दो से ढाई घंटे में दिल्ली से यहां आया जा सकता है।
एनएच 44 (NH 44) या यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway) के जरिए भी मथुरा आप आ सकते हैं। मथुरा के लिए कई अन्य संसाधन भी उपलब्ध है। आप ट्रेन, टैक्सी या फिर रोडवेज की बस से भी सफर कर सकते हैं।
