मथुरा में राजनीति में घुलने लगी चीनी मिल के आंदोलन की कड़वाहट, गांव-गांव तक फैलने लगा आंदोलन
मथुरा की छाता चीनी मिल को फिर से शुरू करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब गांव-गांव फैल ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
छाता चीनी मिल 18 साल से बंद, फिर से शुरू करने की मांग।
आंदोलन गांव-गांव फैला, चुनाव से पहले बना बड़ा मुद्दा।
गन्ना मंत्री के वादे अधूरे, विपक्ष को मिला सियासी हथियार।
जागरण संवाददाता, मथुरा। सरकार के वादों में अटकी चीनी मिल की टूटती उम्मीदों से उपजे आंदोलन की कड़वाहट चुनाव से पहले सियासी पारा तपाने लगी है। आम आदमी द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब गांव-गांव पहुंचने लगा है। उधर, गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री के वादे पर वादे विपक्ष के लिए सियासी हथियार बनते नजर आ रहे हैं।
भाजपा के गढ़ में चीनी मिल विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है। ब्रज क्षेत्र की इकलौती छाता चीनी मिल पर 18 वर्ष पहले बसपा सरकार में 2008-09 में ताला डाल दिया गया था। तब से लगातार इसे दोबारा शुरू करने की मांग उठती रही। 2017 में भाजपा सरकार में पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने मिल शुरू कराने का वादा किया, लेकिन पांच साल तक वादे एक कदम भी न बढ़ पाए।
2022 में दूसरी बार सरकार बनने के बाद उन्हें गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री बनाया गया। इसके बाद गन्ना किसानों की उम्मीदें परवान चढ़ने लगीं। 2023 से 2025 तक 235 करोड़ रुपये का बजट भी जारी हुआ, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। 13 अगस्त से समाजसेवी दीपक शर्मा ने अकेले ही चीनी मिल शुरू कराने को मिल के गेट पर धरना दिया।
इसके बाद धरना एक माह में जनआंदोलन बनकर गांव-गांव पहुंच गया। तीन दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण धरने में शामिल हो रहे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस और सपा ने धरने में शामिल होकर गन्ना मंत्री और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद सरकार के सहयोगी दल रालोद नेता भी मैदान में आ गए।
गन्ना मंत्री के चिर प्रतिद्वंद्वी पूर्व मंत्री ठाकुर तेजपाल सिंह और कुंवर नरेंद्र सिंह ने भी घेरेबंदी कर दी। गठबंधन होने के कारण भले ही ठाकुर तेजपाल धरने के मंच पर नहीं पहुंचे, लेकिन उनके सहयोगी आंदोलन को हवा देने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। स्थानीय राजनीति के जानकारों का कहना है कि चीनी मिल के आंदोलन की कड़वाहट सत्ता दल के सियासी समीकरण बिगाड़ सकती है।
जनांदोलन को देखते हुए भाजपा नेता भी आंदोलन में भूमिका निभा रहे हैं। पूर्व सांसद व भाजपा नेता मानवेंद्र सिंह सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की, लेकिन धरना खत्म नहीं करा सके। अब धरने की कमान संभाले पूर्व सैनिक ललित कर्मयोगी गांव-गांव संपर्क कर आंदोलन को गति दे रहे हैं।
वह कहते हैं कि जब तक काम शुरू नहीं होगा, तब तक आंदोलन चलेगा। किसान नेता दीपक चौधरी कहते हैं कि हमने हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। यदि मिल शुरू न हुई तो चुनाव में इसका असर साफ दिखाई देगा। गन्ना मंत्री जल्द मिल शुरू करवाने के दो बार बयान देकर आंदोलन खत्म करने की अपील जारी कर चुके हैं, लेकिन इसका असर नहीं हुआ।
