ब्रजरज उत्सव में कृष्ण-सुदामा की कहानी ने मोहा मन, लोक कलाकार पद्मश्री रामदयाल शर्मा का अद्भुत मंचन
ब्रजरज उत्सव में पद्मश्री रामदयाल शर्मा ने कृष्ण-सुदामा की मित्रता पर आधारित नौटंकी प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर किया।

सांस्कृतिक संध्या में लोकगीत, भजन और ब्रज की स्वच्छता पर केंद्रित नाटकों का भी मंचन हुआ।
HighLights
पद्मश्री रामदयाल शर्मा ने नौटंकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
कृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता का मार्मिक मंचन हुआ।
ब्रज की स्वच्छता पर आधारित नाटक ने संदेश दिया।
जागरण संवाददाता, मथुरा। ब्रजरज उत्सव की सांस्कृतिक संध्या में शनिवार को पद्मश्री रामदयाल शर्मा ने नौटंकी की प्रस्तुति से दर्शकों को भारतीय लोकनाट्य की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया। धौलीप्याऊ स्थित रेलवे मैदान के मंच पर कृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता की कथा को पारंपरिक नौटंकी शैली में प्रस्तुत किया गया।
संगीत, लोकगायन, प्रभावशाली संवाद और सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पंडाल तालियों से गूंजता रहा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा आयोजित ब्रजरज उत्सव में नौटंकी के माध्यम से हाथरस की पारंपरिक लोकनाट्य शैली की झलक देखने को मिली। नौटंकी के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान रखने वाले रामदयाल शर्मा के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाट्य में गुरुकुल के दिनों में कृष्ण और सुदामा की मित्रता, समय के साथ दोनों के जीवन में आए अंतर और सुदामा की दरिद्रता के प्रसंगों को भावपूर्ण अंदाज में उकेरा गया।
पत्नी के आग्रह पर मुट्ठीभर चावल की पोटली लेकर द्वारिका पहुंचे सुदामा और अपने बालसखा को देखते ही कृष्ण के भावुक हो उठने का प्रसंग विशेष आकर्षण बना। कृष्ण द्वारा सुदामा को गले लगाने और उनके चरण पखारकर सम्मान देने के दृश्य ने मित्रता, प्रेम और समर्पण का संदेश दिया। सुदामा की संकोच भरी मुद्रा और कृष्ण के आत्मीय व्यवहार ने कथा को मार्मिक बना दिया।
कृष्ण-सुदामा की मित्रता की कथा पर आधारित इस चर्चित प्रस्तुति का मंचन 30 सदस्यीय कलाकारों के दल ने किया। इस कथानक को पारंपरिक लोकगायन, चौबोला, लावनी और नाटकीय संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इससे पूर्व इसी मंच पर हकीम सिंह ने लोकगीत गायन, एकता जैन ने लोकगायन, नृत्य, शरद अग्रवाल, कीर्तिदेव बल्लभ पाठक ने भजन और स्पार्क ग्रुप ने नाटक प्रस्तुत किया। परिषद के एसीईओ राजीव पांडेय, डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र, सहायक अभियंता जेके जैन, चंद्रिका राय, चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, अनूप शर्मा मौजूद रहे।
सांझी कला, चित्रांकन और हस्तनिर्मित उत्पाद बने आकर्षण
ब्रजरज उत्सव-2026 में सांझी कला बनाने की विधि का प्रदर्शन किया जा रहा है। उत्सव के गोकुल ग्राम में बलदेव पब्लिक स्कूल की कला शिक्षिका प्रीति चौहान कैनवास पर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के सुंदर चित्र उकेर रही हैं। विपिन कुमार उत्सव में आने वाले लोगों के लाइव पोर्ट्रेट बना रहे हैं।
लोग भी अपने चेहरे का चित्र बनवाने में रुचि दिखा रहे हैं। खजानी इंस्टीट्यूट तथा दक्ष एजुकेशन की प्रशिक्षित छात्राओं द्वारा हाथों से तैयार किए गए गाय के गोबर के दीपक, सजावटी झालर, खिलौने, ज्वेलरी, पगड़ी और बंदनवार सहित विभिन्न आकर्षक उत्पाद लोगों को लुभा रहे हैं।
कन्हैया के धाम को स्वच्छ रखना भी भक्ति, नाटक ने जगाई जिम्मेदारी
भगवान श्रीराधा-कृष्ण के दर्शन और उनकी लीलास्थली की रज माथे से लगाने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और गोकुल आते हैं। लेकिन विडंबना है कि जिन आराध्य के धाम में लोग श्रद्धा से शीश झुकाते हैं, उसी भूमि को कूड़ा-कचरा फैलाकर प्रदूषित भी करते हैं।
सड़कों और नालियों में फेंकी जा रही पानी की खाली बोतलें, प्लास्टिक और खाद्य पदार्थों के रैपर के साथ यमुना के घाटों पर पसरी गंदगी ब्रज की पवित्रता पर सवाल खड़े करती है। आखिर अपने आराध्य के धाम को गंदा कर कैसी भक्ति? इसी सवाल को ब्रजरज उत्सव में नाटक के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से उठाया गया।
ब्रजवैभव अभियान के तहत हार्टफुलनेस की ओर से धौली प्याऊ रेलवे मैदान स्थित उत्सव के मंच पर हम सबने यह ठाना है, ब्रज को स्वच्छ बनाना है थीम पर नाटक प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने संदेश दिया कि श्रीराधा-कृष्ण के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल मंदिरों में दर्शन, पूजा और भजन तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी लीलाभूमि, यमुना, कुंडों, सरोवरों और घाटों को स्वच्छ रखना भी भक्ति का अभिन्न अंग है।
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