सूनी गोद भरने की आस, गोवर्धन के राधाकुंड में अहोई अष्टमी पर लगेगी आस्था की डुबकी
अहोई अष्टमी पर संतान की चाहत में लाखों दंपती मथुरा के राधाकुंड में आस्था की डुबकी लगाएंगे। प्रशासन ने मेले ...और पढ़ें

गोवर्धन का राधाकुंड।
संवाद सूत्र, गोवर्धन (मथुरा)। सूनी गोद की वेदना और संतान की चाहत लिए दंपती आज रात राधाकुंड में आस्था के गोते लगाएंगे। अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में जलस्वरूपा राधारानी के दरबार में होने वाले महास्नान के लिए राधाकुंड सज-संवरकर तैयार है।
किसी की आंखों में संतान प्राप्ति की आस होगी तो कोई अपनी मन्नत पूरी होने की प्रार्थना लेकर पहुंचेगा। मान्यता है कि अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में राधाकुंड में स्नान करने से निसंतान दंपती को संतान सुख का वरदान मिलता है। इसी अटूट विश्वास के चलते देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
अहोई अष्टमी मेला की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शनिवार को एसपी ग्रामीण आलोक राज नारायण और एसडीएम सलोनी गौतम ने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, प्रकाश, सफाई और स्नान की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए। तहसीलदार मनीष कुमार और सीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि कुंड के चारों ओर बैरिकेडिंग की गई है।
स्नान के लिए निर्धारित क्षेत्र बनाया गया है। जल में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लोहे की जाली और बल्लियां लगाई गई हैं। प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार बनाए गए हैं, जिससे भीड़ का दबाव और आमने-सामने की आवाजाही न हो।
कुंड और आसपास के क्षेत्रों में सीसी कैमरों के साथ ड्रोन से भी निगरानी की जाएगी। पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी भीड़ पर नजर रखेंगे। परिक्रमा मार्ग से आवारा पशुओं को हटाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति न बने। यातायात को सुचारु रखने के लिए बैरियर और पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
कुंड के चारों ओर अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था और सजावट की गई है। सफाई के लिए अतिरिक्त कर्मचारी लगाए गए हैं। मेला व्यवस्थाओं पर एसडीएम और सीओ लगातार नजर रखेंगे।
ये रहेंगी विशेष व्यवस्थाएं
- रविवार सुबह 10 बजे से सोमवार सुबह 10 बजे तक राधाकुंड परिक्रमा मार्ग पर ई-रिक्शा प्रतिबंधित रहेंगे।
- परिक्रमा मार्ग में बदलाव किया गया है। श्रद्धालुओं को गौराधाम कॉलोनी मार्ग से निकाला जाएगा
- स्थानीय परिक्रमार्थियों से भी परिवर्तित मार्ग का प्रयोग करने की अपील की गई है।
- संतान प्राप्ति की कामना से आने वाले दंपतियों के स्नान के लिए अलग व्यवस्था रहेगी।
- पीए सिस्टम से धार्मिक जानकारियों के साथ प्रशासनिक निर्देश प्रसारित किए जाएंगे।
- सुरक्षा के लिए ड्रोन, सीसी कैमरे और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती रहेगी।
आधी रात को जाग उठती है संतान की आस
धार्मिक मान्यता के अनुसार अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में राधाकुंड में सभी देवताओं और तीर्थों का वास होता है। इस शुभ घड़ी में स्नान करने से निसंतान दंपतियों की संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। स्नान के बाद दंपती एक फल का त्याग करते हैं।
मान्यता है कि संतान प्राप्ति तक उस फल का सेवन नहीं किया जाता। संतान सुख मिलने पर दंपती दोबारा राधाकुंड आकर स्नान करते हैं। कुछ दंपती इसके बाद त्यागे हुए फल का सेवन शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ जीवनभर उसका सेवन नहीं करते।
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