गोवर्धन(मथुरा), संसू। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के प्रशासन द्वारा मनमाने तरीके से अनुपालन पर मंगलवार को लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। 21 किमी लंबे परिक्रमा मार्ग पर सभी बाजार बंद रहे, बाइक रैली निकाल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।

धार्मिक दृष्टिकोण से गिरिराजजी पर्वत का बहुत महत्व है। करोड़ों श्रद्धालु यहां 21 किमी लंबी परिक्रमा लगाने आते हैं। इसका डेढ़ किमी का एरिया राजस्थान सीमा में पड़ता है। एनजीटी ने परिक्रमा मार्ग में जाम, प्रदूषण, गंदगी और पर्वत के संरक्षण को लेकर 4 अगस्त 2015 को 17 बिदुओं को लेकर आदेश दिए थे। प्रशासन ने गोवर्धन परिक्रमा मार्ग को मनमाने ढंग से नो व्हीकल जोन और नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित कर दिया। एनजीटी के आदेशानुसार वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग भी नहीं बनाया। स्थानीय लोगों को इससे काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। मंगलवार को इसके विरोध में क्षेत्रीय लोगों ने गोवर्धन बंद कर दिया जो पूरी सफल रहा। गोवर्धन, राधाकुंड, राधाकुंड देहात, आन्यौर, पूंछरी, जतीपुरा के लोगों ने बंद का समर्थन करते हुए अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। भोर में ही तमाम भीड़ सड़कों पर उतर आई और बाइक रैली निकाल नारेबाजी की। व्यापार मंडल के संजीव लालाजी, गणेश पहलवान, जुगल पटेल, श्याम सुंदर उपाध्याय, ज्ञानेंद्र राणा, घन श्याम अग्रवाल उर्फ वाचे लाला, मनीष लंबरदार, कान्हा मुखिया, हेमंत शर्मा, रामधन शर्मा ने अगुवाई की। प्रदर्शन में ये रहे मौजूद

दिनेश प्रधान, मनोज लालाजी, भानु पाराशर, पवन खंडेलवाल, दाऊजी गौड़, संजय शर्मा, मनोज लंबरदार, ज्ञानो, विष्णु भगवान, कपिल, कान्हा बंसल, नितेश, पंकज, भोलू, सुनील पाठक, केशव मुखिया, वरुण, दीनदयाल, जीतू बंसल, डॉ रविन्द्र पांडेय, विष्णु सैनी, गौरव, आकाश, परशुराम, हरभान सिंह, विजय सिंह आदि मौजूद थे। एनजीटी ने ये दिए थे आदेश

-दस मीटर चौड़ा मार्ग मकान और आश्रमों के पीछे से बनाकर वाहनों को निकाला जाए। परिक्रमा मार्ग से सिर्फ मेडिकल और फायर सर्विस के वाहनों को ही छूट दी जाए। परिक्रमा मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराकर इसमें नए निर्माण पर रोक लगाई जाए। गंदा पानी के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाए। कूड़ा कलेक्शन और निस्तारण किया जाए। पक्की के साथ ही कच्चा परिक्रमा मार्ग बनाया जाए। इसके निर्माण में पेड़ पौधों का नष्ट नहीं किया जाए। गंदे पानी को ट्रीटमेंट करके वृक्षों की सिचाई की जाए। मार्गों की हालत सुधारी जाए। परिक्रमा मार्ग से दो सौ मीटर की दूर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराएं। वन विभाग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा रिजर्व फोरेस्ट घोषित किया जाए। अधिक से अधिक पौधे लगाएं। श्राइन बोर्ड की तर्ज पर एक स्वतंत्र बोर्ड बनाकर धार्मिक स्थल पर उचित व्यवस्थाएं बनाई जाए। पर्वत, कुंड और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण किया जाए। ये थीं प्रदर्शनकारियों की मांग

- स्थानीय लोगों के वाहन पर प्रतिबंध न लगाया जाए। परिक्रमा मार्ग मे प्याऊ और भंडारे पर रोक न लगाई जाए। ई रिक्शा चलने दिए जाएं। परिक्रमा मार्ग स्थित मैरिज होम में मांगलिक कार्यक्रम के लिए वाहनों की आवाजाही की जाए। अतिक्रमण के नाम पर की जा रही तोड़फोड़ बंद हो। मार्ग मे लगी जंजीर खोली जाएं। निर्माण कार्य पर लगाई रोक हटाई जाए। डीजे बजाने की मंजूरी प्रदान की जाए। ठेल ढकेल वालों को उचित स्थान मिले। ब्रज के मंदिरों को श्राइन बोर्ड से बाहर किया जाए। श्रद्धालुओं से अभद्रता बंद की जाए। इन्होंने की है याचिका दाखिल-

पर्वतराज के सुंदरीकरण के लिए संत आनंद बाबा ने एक याचिका एनजीटी में दाखिल कर रखी है। इसकी पैरवी प्रसिद्ध पर्यावरण एमसी मेहता ने की, लेकिन उनके अस्वस्थ्य होने पर सार्थक चतुर्वेदी याची की तरफ से कोर्ट में पैरवी कर रहे हैं।

Posted By: Jagran

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