जागरण संवाददाता, मथुरा: सोमवार को एक युवती की सांस थमते ही जिला अस्पताल संवेदनहीन हो गया। परिजन खुद ही स्ट्रेचर ढूंढ़ कर लाए और शव को वार्ड से बाहर लाए। इतना ही नहीं, इन्हें शव वाहन भी उपलब्ध न हो सका।

अलीगढ़ सुनामई निवासी 21 वर्षीय डॉली को गंभीर बीमारी के कारण जिला अस्पताल इमरजेंसी में भर्ती कराया था। सोमवार सुबह डॉली की मौत हो गई। डॉली के पिता महावीर और उसकी बहन नीतू ने शव वाहन की गुहार की। लेकिन, किसी ने नहीं सुनी। चिकित्साकर्मियों की बेरुखी देख परिजन ही बाहर से स्ट्रेचर लाए और डॉली के शव को लेकर वार्ड से बाहर आए। इसके बाद गांव जाने के लिए किराए का वाहन लिया। परिजनो ने ही शव को वाहन तक पहुंचाया। नियम तो ये है

जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु होने पर म़ृतक के परिजनों की मांग पर निश्शुल्क शव वाहन से मृतक को घर तक पहुंचाने का प्रावधान है। इस मामले में सीएमएस डॉ. वीके गुप्ता ने कहा कि शव वाहन के लिए ड्राइवर नहीं है। हालांकि ड्राइवर की मांग शासन से की जा चुकी है। अगर, मृतक के परिजन संपर्क करते, तो ड्राइवर की व्यवस्था कर शव को उनके घर तक पहुंचाया जाता।

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