योगेश जादौन, मथुरा: भैंसा गांव में रहने वाले मेहनतकश परिवार की नींद एक फोन ने उड़ा दी। फोन क्या था उनके लिए देवी की मौत का संदेश था। फोन पर दूसरी ओर परिवार का मुखिया मौजूद था। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली में हमारे मुसीबत के समय देवी बनकर आईं सुषमा की मौत हो गई है। पूरा परिवार उनकी मौत पर शोक मनाए। इसके बाद घर में मौजूद सभी महिला और बच्चों ने मौन रखकर शोक मनाया।

भैंसा गांव के एक गरीब परिवार का नवयुवक वीरेंद्र सिंह बघेल रिफाइनरी में ठेके पर वेल्डिग का काम करता था। वर्ष 2016 में उसे पहचान के ही एक व्यक्ति ने सऊदी अरब चलने को कहा। अधिक कमाने के लोभ में वह बिना पूरी कागजी कार्यवाही के सऊदी अरब चला गया। यहां वह जुबैल सिटी में छह माह तक रहे। कागजात पूरे न होने के कारण पकड़े गए। तब घर वालों को यह भी पता नहीं था कि उनका बेटा कभी छूट पाएगा। पिता छग्गन लाल बघेल का इसी दुख में देहांत हो गया। बड़े भाई फतह सिंह ने मथुरा के भाजपा नेता सतीश शर्मा का सहयोग लेकर तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की। विदेश मंत्री ने तत्काल संज्ञान लिया। नतीजा वीरेंद्र सिंह की घर वापसी हो गई। जब सुषमा स्वराज की मौत की सूचना मिली तो कोटा में काम कर रहे वीरेंद्र सन्न रह गए। घर फोन किया और पत्नी सरिता देवी और भाभी रामवती से कहा कि एक देवी की मौत हुई है, सब शोक मनाएं। सविता देवी ने कहा कि पूरा घर ही नहीं देश भी चाहेगा कि ऐसी देवी फिर जन्म ले। दूसरे के दुख को समझने वाले हमारे बीच में अब कम हैं।

''पूरे घर के लिए यह खबर दुख का पहाड़ टूटने सरीखी है। उनकी मदद को हम कैसे भुला सकते हैं। बड़े भाई बड़ौदा में आइसक्रीम फैक्ट्री में काम करते हैं। उनसेरात को ही बात हो पाएगी, मगर आज पूरे परिवार ने शोक मनाया है।''

- वीरेंद्र सिंह, कोटा से फोन पर

सुषमा स्वराज की मौत की खबर सुन रो पड़ी सुदेवी:

गोवर्धन: चार दशक पूर्व अपना वतन गोसेवा के लिए छोड़ भारत में आकर बसीं फ्रेडरिक इरिन ब्रूनिग (सुदेवी) की वीजा अवधि सुषमा स्वराज की वजह से ही बढ़ी। सुषमा की मौत की खबर सुन सुदेवी की आंखें बरस पड़ीं।

जर्मन गोभक्त फ्रेडरिक इरिन ब्रूनिग में बेजुबान गोवंश की सेवा की ललक है। इस कार्य के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान भी मिला। गोवंश की मदर टेरेसा सूदेवी स्टूडेंट वीजा पर हैं। इसकी अवधि हर वर्ष बढ़वानी पड़ती है। सुदेवी के वीजा की अवधि 25 जून तक थी। सुदेवी ने 12 मई को लखनऊ स्थित एफआरओ (फॉरेन रजिस्ट्रेशन ऑफिस) में ऑनलाइन आवेदन किया था। 22 मई को बिना कोई कारण बताए आवेदन निरस्त कर दिया गया। व्यथित सुदेवी ने पदमश्री सम्मान वापस कर जर्मनी लौटने की घोषणा कर दी। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सुदेवी की वीजा विस्तार आवेदन निरस्त करने की रिपोर्ट तलब की। सुषमा के ट्वीट के बाद सुदेवी ने दोबारा ऑनलाइन एप्लाई किया तो कुछ समय बाद ही रिप्लाई में वीजा की अवधि एक वर्ष बढ़ा दी गई। सुषमा की मौत पर सुदेवी ने कहा कि वह मदद का अवतार थीं।

Posted By: Jagran

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