संवाद सूत्र, गोवर्धन (मथुरा): श्रद्धा का शिखर, आस्था का शहर, मन्नतों का दरबार, अब कोरोना की बंदिशों से मुक्त हो जाएगा। एक अक्टूबर से मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे तो एक बार फिर दानघाटी गिरिराजजी श्रृंगार धारण कर भक्तों को दर्शन देते नजर आएंगे। इसके लिए आज संबंधित न्यायालय में भेंट पूजा का ठेका उठाया जाएगा।

गोवर्धन की 21 किमी परिक्रमा में तीन मंदिर दानघाटी, मुकुट मुखारविद और जतीपुरा मुखारबिद प्रसिद्ध हैं। जिनमें दानघाटी मंदिर पर सबसे ज्यादा भक्तों का आवागमन रहता है। कोरोना काल में पिछले साढ़े छह महीने से मंदिर के कपाट बंद हैं। मुकुट मुखारबिद और जतीपुरा मुखारबिद मंदिर के कपाट पूर्व में आमजन के लिए खोले जा चुके हैं, परंतु दानघाटी मंदिर के कपाट अभी बंद थे। मंदिर कर्मी अशोक पुरोहित ने बताया कि मंदिर के कपाट एक अक्टूबर से खोले जाएंगे। इसके लिए बुधवार को भेंट का ठेका संबंधित न्यायालय में उठाया जा रहा है। दानघाटी मंदिर की शाखा लक्ष्मी नारायण मंदिर के कपाट भी इसके साथ खोल दिए जाएंगे। यूं बताते हैं इतिहास के पन्ने

- 1957 में मंदिर की नींव रखी गई तो रोशनी के लिए सिर्फ एक लालटेन लटकी रहती थी, लेकिन आज विशाल मंदिर है। करीब चार दशक पूर्व प्रभु पर चुनिदा पोशाक थीं। वक्त के बदलते परि²श्य में 1998 में प्रभु की मीनार पर स्वर्ण कलश और स्वर्ण ध्वज प्रभु के वैभव का यशोगान कर रहा है। 2003 में चांदी के बने दरवाजे पर नक्काशी नजरों को ठहरने पर मजबूर कर देती है। 2005 में 51 किलो चांदी का छत्र प्रभु का गुणगान करने लगा और 2013 में चांदी के सिंहासन पर प्रभु विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने लगे। दानकेलि कौमुदी ग्रंथ में लीला का वर्णन है। लीला को गौड़ीय संप्रदाय के लोग आज भी भक्ति रस में गाते हैं। प्रभु की इस लीला के कारण ही इस स्थली को दानघाटी के नाम पुकारा गया।

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