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मथुरा: छाता एथेनॉल प्लांट को कैबिनेट से मंजूरी, लेकिन चीनी मिल की मांग पर अड़े आंदोलनकारी

Published: Thu, 17 Sep 2026 01:18 AM (IST)

मथुरा की छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है, लेकिन आंदोलनकारी अभी भी चीनी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट को कैबिनेट की मंजूरी मिली।

  2. आंदोलनकारी चीनी मिल शुरू करने की मांग पर लगातार अड़े हैं।

  3. पूर्व सैनिक ने मई तक मिल न शुरू होने पर आत्महत्या की धमकी दी।

जागरण संवाददाता, मथुरा। छाता चीनी मिल में एथनाल प्लांट की स्थापना को प्रदेश सरकार की कैबिनेट से मंजूरी भले ही मिल गई, लेकिन अभी चीनी मिल शुरू होने की राह आसान नहीं है। शिलान्यास होने के बाद करीब दो वर्ष लगेंगे। 34 दिन से धरना दे रहे लोग बिना चीनी मिल के मानने को तैयार नहीं हैं।

उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक चीनी मिल नहीं शुरू होगी, धरना जारी रहेगा। आंदोलन की अगुवाई कर रहे पूर्व सैनिक ने मई तक चीनी मिल न शुरू होने पर आत्महत्या की धमकी दी है। वहीं गन्ने की खेती की परिस्थितियां चीनी मिल के अनुकूल नहीं है। जिले में वर्तमान में 428 हेक्टेअर में गन्ने की खेती हो रही है, जबकि पूरे साल मिल के संचालन के लिए चार हजार हेक्टेअर से ज्यादा खेती की जरूरत होगी।

वर्ष 1978 में छाता में चीनी मिल की स्थापना हुई। वर्ष 2008 में बसपा सरकार ने घाटा होने पर मिल में पेराई सत्र बंद कर दिया। 2022 में दोबारा भाजपा सत्ता में आई। छाता विधायक चौधरी लक्ष्मी नारायण गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री बनाए गए। इसके बाद मिल शुरू होने की उम्मीदें जागीं।

वर्ष 2023 में चीनी मिल शुरू कराने के लिए सरकार ने 550 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अब तक तीन बजट में 235 करोड़ रुपये का प्रविधान हुआ। राज्य चीनी निगम लखनऊ ने टेंडर प्रक्रिया की, मगर दरें अधिक होने पर किसी कंपनी ने सहभागिता नहीं की। अक्टूबर 2024 में शासन के निर्देश पर नए सिरे से अलग-अलग डीपीआर बनाई गई, जिसकी लागत करीब 700 करोड़ से अधिक है।

चीनी मिल को लेकर 13 अगस्त को धरना शुरू हुआ था। 34 दिन से लगातार धरना चल रहा है। गांव-गांव लोग जुट रहे हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छाता चीनी मिल में एथनाल प्लांट की स्थापना को कैबिनेट में मंजूरी दी है। डुअल मोड आधारित इस प्लांट में मक्का, धान और गन्ना, तीनों से एथेनाल बनाया जा सकेगा। स्थापना होने के बाद उत्पादन शुरू होने में करीब दो वर्ष लगेंगे।

इसमें प्रति वर्ष 3.96 करोड़ लीटर एथनाल का उत्पादन होगा। ऐसे में कैबिनेट से एथेनाल प्लांट को मंजूरी के बाद उम्मीद थी कि आंदोलनकारी कुछ नरम पड़ेंगे, लेकिन सरकार का यह प्रयास भी उन्हें मना नहीं पाया। धरना की अगुवाई कर रहे पूर्व सैनिक ललित कर्मयोगी कहते हैं कि हमें एथनाल प्लांट नहीं चीनी मिल चाहिए। उन्होंने कहा कि हम चीनी मिल के लिए मई तक इंतजार करेंगे, उसके बाद खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर लेंगे।

गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण का कहना है कि एथनाल प्लांट को तैयार होने के बाद उत्पादन में कम से कम दो वर्ष लगेंगे। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश में पहली यूनिट छाता में ही बनेगी। इसमें एथनाल प्लांट, चीनी का उत्पादन और बायोमास बिजली उत्पादन होगा।

दस हजार कुंतल गन्ना चाहिए प्रतिदिन
छाता में एक हजार टीसीडी क्षमता की चीनी मिल प्रस्तावित है। मिल चालू करने के लिए दस हजार कुंतल गन्ना की प्रतिदिन पेराई के लिए जरूरत होगी। इसके लिए जिले में चार हजार हेक्टेअर क्षेत्र में गन्ना की खेती की जरूरत होगी, तभी मिल चल सकेगी। गन्ना विभाग के अनुसार जिले में मौजूदा समय 428 हेक्टेअर क्षेत्र में ही गन्ना की खेती है। जरूरत के सापेक्ष मात्र 10 प्रतिशत ही गन्ना की खेती है, जो काफी कम है।

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