मथुरा में काम आई वर्टिकल व्यवस्था, बिजली बिल बकाएदारों से 352 करोड़ की रिकार्ड वसूली
मथुरा में लागू वर्टिकल व्यवस्था ने बिजली बिल वसूली में रिकॉर्ड बनाया है, पांच माह में 352 करोड़ से अधिक ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, मथुरा। शहर में लागू की गई वर्टिकल व्यवस्था ने बिजली में रिकार्ड वसूली कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। मात्र पांच माह में 352 करोड़ से अधिक राजस्व मिला है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.66 करोड़ रुपये अधिक है।
यह वर्टिकल व्यवस्था से संभव हो सका है, क्योंकि इसके तहत हर काम के लिए अलग-अलग अधिकारियों की जिम्मेदारी तय है। इन पांच में से तीन महीनों में वसूली का प्रतिशत 102 प्रतिशत से अधिक रहा है। इस उपलब्धि से आने वाले सात माह में लक्ष्य से अधिक वसूली की उम्मीद जताई जा रही है।
डीवीवीएनएल द्वारा मथुरा शहर में एक अप्रैल से वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई। इसके तहत वाणिज्य, तकनीकी एवं शिकायत निवारण के लिए अलग-अलग एक्सईएन लगाए गए हैं। ये अधिकारी सिर्फ अपना ही काम देख रहे हैं, केवल इमरजेंसी में ही दूसरे के काम में सहयोग करते हैं।
हर एक व्यवस्था की जिम्मेदारी तय होने का असर पांच माह में नजर आया है। निगम द्वारा कुछ कर्मचारी उपभोक्ताओं को काल कर बिल का भुगतान जमा करने के कार्य में लगाए हैं। साथ ही दो माह से अधिक का भुगतान होने पर लखनऊ से ऑनलाइन बिजली बंद करने की भी व्यवस्था की गई।
शुरुआती दिनों में तो लखनऊ से एक दिन में तीन हजार से अधिक घरों की बिजली बंद की गई, जिसका असर एक दिन में चार करोड़ रुपये जमा हुए। हालांकि बाद में उपभोक्ताओं की परेशानी को देखते हुए इसमें अब कमी की गई है। अब पांच सैकड़ा तक ही बकाएदार उपभोक्ताओं की बिजली बंद की जा रही है।
इसके चलते उपभोक्ता बिल का समय पर भुगतान करने की ओर भी जागरूक हुए हैं। इसका असर यह रहा कि मात्र पांच माह में निगम ने पिछले वर्ष से अधिक वसूली कर रिकार्ड बनाया है।
शहरी मंडल में आते ये तीन डिवीजन
शहरी क्षेत्र में तीन डिवीजन में करीब 21 बिजली उपकेंद्र संचालित हैं। डिवीजन कैंट प्रथम, डिवीजन द्वितीय वृंदावन एवं डिवीजन तृतीय कृष्णा नगर है। प्रथम डिवीजन में पांच माह में 109.04 करोड़, द्वितीय में 110.76 एवं डिवीजन तृतीय में 133.12 करोड़ रुपये की वसूली हुई है।
वर्टिकल व्यवस्था लागू होने से शहरी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में भी सुधार हुआ है। वहीं वसूली भी रिकार्ड हुई है। शहरी मंडल में पिछले वर्ष की तुलना 29.66 करोड़ रुपये की अधिक वसूली हुई है, जो रिकार्ड है। इस वित्तीय वर्ष में वसूली लक्ष्य से अधिक पहुंचाने का प्रयास हो रहा है।
