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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Banke Bihari Mandir: आगरा से बनी जरी की विशेष पोशाक पहनेंगे बांकेबिहारी, मनेगा 542वां प्राकट्योत्सव

By Vipin ParasharEdited By: Abhishek Saxena
Published: Fri, 25 Nov 2022 09:37 PM (IST)

Banke Bihari Mandir बिहार पंचमी पर प्राकट्योत्सव पर आराध्य को परोसा जाएगा मेवायुक्त केक। बांकेबिहारी का 542वां प्राकट्योत्सव 28 नवंबर ...और पढ़ें

Banke Bihari Mandir: आगरा से बनी जरी की विशेष पोशाक पहनेंगे बांकेबिहारी
Banke Bihari Mandir: आगरा से बनी जरी की विशेष पोशाक पहनेंगे बांकेबिहारी

संवाद सहयोगी, वृंदावन- मथुरा। संगीत सम्राट स्वामी हरिदास के लडै़ते ठा. बांकेबिहारी की सेवा आज भी उनकी परंपरा के अनुसार बालरूप में होती है। बालरूप में ही मंदिर सेवायत भाव के अनुसार आराध्य की सेवा कर रहे हैं। अब आराध्य का प्राकट्योत्सव है, तो अंगसेवी एक बालक के ही भांति उनका जन्मोत्सव मनाने की तैयारी में जुटे हैं। ठाकुर जी प्राकट्योत्सव पर आगरा में तैयार जरी की पोशाक धारण करेंगे।

ठाकुर बांकेबिहारी का 542वां प्राकट्योत्सव मनेगा

भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी 28 नवंबर को ठा. बांकेबिहारी का 542वां प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा। ठा. बांकेबिहारी के प्राकट्य के बाद से ही इस तिथि को बिहार पंचमी का नाम दिया गया। बांकेबिहारी का प्राकट्योत्सव मंदिर से लेकर प्राकट्य स्थली निधिवन राज मंदिर में उल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। भोर में निधिवन राज मंदिर में प्राकट्य स्थली पर ठाकुर जी के चरणचिन्ह का पंचामृत से महाभिषेक, आरती और शोभायात्रा निकाली जाएगी। ये शोभायात्रा शाम को निधिवन मंदिर से गाजेबाजे के साथ निकलेगी और ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर पहुंचेगी।

ठाकुरजी के लिए बेशकीमती पोशाक की तैयारी

मंदिर सेवायत प्रणब गोस्वामी ने बताया, ठाकुरजी के प्राकट्योत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ठाकुरजी के लिए आगरा के कारीगर जरी की विशेष पोशाक तैयार कर रहे हैं। ये बेशकीमती और मयूर की झलक दिखाती हुई पोशाक हाेगी।गोस्वामी ने बताया, जन्मोत्सव पर आराध्य को सुबह बालभोग में पंचमेवायुक्त हलवा परोसा जाएगा, दोपहर को राजभोग में अनेक व्यंजनों के साथ विशेष रूप से 21 किलो का केक भी अर्पित होगा। ये मावा से तैयार होगा और पंचमेवा भी डाले जाएंगे।

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अपने भाव से हो रही सेवा

ठा. बांकेबिहारीजी की सेवा बालस्वरूप में होती है। केक काटना भले ही पश्चिमी संस्कृति का प्रतीक है। लेकिन, समय के साथ बदलाव बहुत देखे जाते हैं। ठाकुरजी के जन्म के उत्सव को उल्लासमय बनाने के लिए सेवायत हों या भक्त अपने भाव के अनुरूप मनाते हैं। ठाकुरजी को जो केक अर्पित किया जाएगा, वह मावा का बना होगा और उसमें पंचमेवा होंगे। लेकिन, केक काटा नहीं जाएगा। इसका प्रसाद भक्तों को बंटा जाएगा। जो कि भाव रूप में जन्मोत्सव मनाने का भक्तों का अपना अलग-अलग तरीका है।-गोपेश गोस्वामी, सेवायत: ठा. बांकेबिहारी मंदिर।