बांकेबिहारी गलियारा: भूमि अधिग्रहण में धीमी गति, 13 माह में केवल 14 प्रतिशत जमीन खरीदी
बांकेबिहारी गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण में बड़ी चुनौती है, जहाँ 13 माह में केवल 14% भूमि ही खरीदी जा ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
बांकेबिहारी गलियारे के लिए 13 माह में सिर्फ 14% भूमि खरीदी।
स्थानीय विरोध, मुआवजे के बावजूद अधिग्रहण प्रक्रिया धीमी।
बिहारी जी रसोई, हरगुलाल हवेली जैसी विरासतें होंगी संरक्षित।
जागरण संवाददाता, मथुरा। बांकेबिहारी मंदिर की राह में तंग कुंज गलिया। गलियों से गुजरती श्रद्धालुओं की भारी भीड़। भीड़ का दमघोंटू माहौल। इस सबसे बचे तो बंदरों का डरा। इस डर को दूर करने की राह है गलियारा। मगर, अभी इस गलियारे की राह में भूमि खरीद की प्रक्रिया चुनौती बनी हुई है।
गलियारे के लिए मंदिर के आसपास 19,182 वर्गमीटर भूमि खरीदनी है। मगर, अभी 14 प्रतिशत भूमि ही खरीदी जा सकी है। उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति का गठन हुए एक वर्ष बीत गया, लेकिन अब तक आवश्यकता के विपरीत 14 प्रतिशत भूमि ही खरीदी जा सकी है। विरोध के बीच बाकी भूमि का अधिग्रहण बहुत आसान नहीं है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में वर्ष 2022 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर होने वाली मंगला आरती में भगदड़ मचने से दो श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई थी। तब सरकार ने हाई कोर्ट में मंदिर के लिए गलियारा बनाने का प्रस्ताव दिया। 2023 में पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट से गलियारा को हरी झंडी मिल गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट से भीू इसके लिए स्वीकृति मिल गई।
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति का गठन किया। समिति ने भूमि अधिग्रहण का प्रयास शुरू किया, लेकिन मंदिर के सेवायत, दुकानदार और गलियारा के दायरे में आने वाले लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। मंदिर के आसपास घनी आबादी है। गलियारा बनाने के लिए यहां बनी इमारतों को तोड़ना होगा।
इसके लिए मकानों के स्वामियों की भूमि और आवास खरीदे जाने हैं। उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के प्रयासों से भूमि खरीद की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन विरोध इतना हुआ कि खरीद की गति धीमी हो गई। गलियारा के लिए मास्टर प्लान के मुताबिक 19,182 वर्गमीटर भूमि खरीदनी है।
13 माह बाद भी 2696 वर्गमीटर भूमि ही खरीदी जा सकी है। यह हाल तब है जब गलियारा के दायरे में आने वाले भवन मालिकों को सरकार ने भरपूर मुआवजा, मकान के बदले नो प्राफिट नो लास पर फ्लैट, दुकान स्वामियों को मुआवजा और गलियारा में इसके बदले दुकान का आवंटन करने का आश्वासन दिया है।
एक नजर
- 14 प्रतिशत भूमि ही गलियारा के लिए खरीदी जा सकी है।
- 86 प्रतिशत भूमि खरीदी जाना समिति के लिए चुनौती है।
- 28 लोगों ने ही अब तक की है भूमि की रजिस्ट्री
- 19182 वर्गमीटर भूमि खरीदी जानी है
- 197 हैं कुल चिन्हित भूखंड
छह माह बाद समिति को मिली पहली सफलता
उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति का अगस्त 2025 में गठन हुआ। गठन के छह महीने बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई। 17 जनवरी 2026 को राधावल्लभ मंदिर के सेवायत परिवार की यति गोस्वामी ने अपने 69.26 वर्गमीटर भूखंड की पहली रजिस्ट्री की।
हम लगातार भवन स्वामियों के संपर्क में हैं। उन्हें अपनी भूमि देने के लिए समझा रहे हैं। सरकार की ओर से उन्हें भरपूर मुआवजा भी दिया जा रहा है। मकान के बदले फ्लैट और दुकान के बदले दुकान देने की भी व्यवस्था की गई है।- डा. पंकज वर्मा, एडीएम वित्त
बिहारी जी की रसोई और हरगुलाल हवेली होंगी संरक्षित
वृंदावन के केवल मंदिर नहीं। इनके साथ सदियों पुरानी स्मृतियां, गलियां, हवेलियां और धार्मिक परंपराओं के साथ परंपराएं और संस्कृति है। प्रस्तावित बांकेबिहारी धाम में यह समाप्त न हो जाएं। यह विकास और विरासत के बीच संतुलन की नई तस्वीर पेश करेगा।
सुप्रीम कोर्ट में उच्चाधिकार प्रबंधन समिति की ओर से पेश योजना में सुविधाओं के साथ सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संपत्तियों को संरक्षित कर परिसर में समाहित करने की योजना बनाई है। योजना में बांकेबिहारी मंदिर के आसपास मौजूद ऐतिहासिक विरासत में बिहारी जी रसोई और हरगुलाल की हवेली परिसर की बात विशेष रूप से की गई है। इसके साथ ही ऐतिहासिक देवस्थलों के चार गर्भगृहों को भी बनाए रखते हुए नए परिसर में एकीकृत करने की योजना है।
इसके अलावा योजना में प्रभावित क्षेत्र के आसपास मौजूद संपत्तियों तक पहुंच बनाए रखने पर जोर दिया गया है। प्रभावित दुकानों के अंदर ही पुनर्वास की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रशासन का कहना है कि पूरी योजना को सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
