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भव्य होगा वृंदावन और बांकेबिहारी धाम, 3 मंजिल का बनेगा गलियारा; 17 हजार श्रद्धालु एक साथ कर सकेंगे दर्शन

Published: Sun, 13 Sep 2026 02:18 AM (IST)

वृंदावन के बांकेबिहारी धाम गलियारे का तीन मंजिला भव्य नक्शा सामने आया है, जिससे श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. तीन मंजिला गलियारा 17 हजार श्रद्धालुओं को एक साथ दर्शन कराएगा।

  2. पारंपरिक ब्रज शैली में बनेगा, विरासत स्थलों को भी संरक्षित करेगा।

  3. जूते घर, अस्पताल, क्लॉक रूम जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

विनीत मिश्रा, मथुरा। वृंदावन और बांकेबिहारी धाम (गलियारा) का पहली बार पूरा नक्शा सामने आ गया है। यह तीन मंजिल का भव्य और दिव्य होगा। इसके बनने से वहां बांकेबिहारी की छवि निहारने के लिए धक्का-मुक्की बंद हो जाएगी। भीड़ से संकरी गलियों में दम घुटने जैसा कड़वा अहसास समाप्त हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर की उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने धाम की पूरी योजना पेश कर दी है।

प्रस्तावित धाम में श्रद्धालुओं को बेहतरीन सुविधाएं मिलेंगी। पौने पांच एकड़ में फैले धाम में तीन तल होंगे। निचला भूतल (लोअर ग्राउंड फ्लोर), ऊपरी भूतल (अपर ग्राउंड फ्लोर) और पहली मंजिल पर 17 हजार श्रद्धालु एक बार में समाहित हो सकेंगे। परियोजना के लिए 19,182 वर्ग मीटर भूमि अभी खरीदनी है, जबकि 2600 वर्ग मीटर भूमि ली जा चुकी है। समिति ने सेवायतों की भूमिका पर कहा है कि वह भूमि खरीद में सहयोग की जगह असहमति जता रहे हैं।

बांकेबिहारी मंदिर की व्यवस्था सुधारने को विशेषज्ञों की सहायता से 175 पन्नों की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके अनुसार तीन तल बनेंगे। गलियारा के प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग होंगे। नौ हजार वर्ग मीटर में फैले इस निचले तल पर चार हजार श्रद्धालुओं के लिए बैठने की व्यवस्था रहेगी। उससे ऊपरी तल पर 4800 श्रद्धालुओं की व्यवस्था रहेगी।

पहली मंजिल पर 1260 श्रद्धालु रह सकेंगे। गलियारे में दूसरी सुविधाएं भी व्यापक रहेंगी। यहां 15 हजार जोड़ी जूता एक साथ रखने वाला जूता घर बनेगा। इसके अलावा क्लाक रूम, शौचालय, पेयजल सुविधा रहेगी। स्तनपान को शिशु गृह और दस बेड का आपातकालीन अस्पताल होगा।

आधुनिक कंक्रीट के बजाए पारंपरिक ब्रज शैली प्रदर्शित करता हुआ यह गलियारा होगा। ब्रज में लाल बादामी बलुआ पत्थर, छतरियां, जालीदारी खिड़कियां और पारंपरिक मेहराब का उपयोग होता है। गलियारे का डिजाइन इस तरह से तैयार किया गया है। ईशान कोण से ही श्रद्धालुओं को मुख्य प्रवेश में प्रवेश मिलेगा। गलियारे में स्थानीय व्यंजन और भोग सामग्री की दुकानें भी होंगी।

दुकान आवंटन में यहां के दुकानदारों के पुनर्वास का ध्यान रखा जाएगा। समिति ने यह भी बताया कि यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ई-रिक्शा और आटो के छह रूट निर्धारित कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों वृंदावन और बांकेबिहारी मंदिर आने वाले भक्तों की कठिनाई को देखते हुए उच्चाधिकार प्रबंधन समिति को 25 अगस्त तक कार्ययोजना बनाने के आदेश दिए थे। इसमें आधुनिक तकनीकी और विशेषज्ञों की मदद लेने को कहा था। इसके बाद प्रशासन ने यह योजना दाखिल की थी।

बाढ़ के निशान से एक मीटर ऊपर बनेगा गलियारा
पूरा गलियारा यमुना किनारे तक बन रहा है, ऐसे में मास्टर प्लान में बाढ़ के खतरे को भी ध्यान में रखा गया है। वर्ष 2025 में यमुना में बाढ़ के दौरान 172.8 मीटर जलस्तर हो गया था। इसी को आधार बनाते हुए गलियारो को इस स्तर से एक मीटर ऊपर उठाकर बनाया जाएगा।

गलियारा में संरक्षित होगी विरासत
गलियारा निर्माण के दौरान इसके क्षेत्र में आने वाली धरोहरों को संरक्षित रखते हुए इसमें समाहित कर लिया जाएगा। यह श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होंगी। मंदिर की गली नंबर दो में फलाहारी बाबा का आश्रम, राधा गोपाल मंदिर, अष्टसखी मंदिर, ठाकुर जी की मंदिर के अंदर स्थित रसोई, हरगुलाल की हवेली, गौड़ीय मठ के मूल गर्भगृह हैं। इन सभी संरक्षित कर नए परिसर में इन्हें समाहित किया जाएगा।

यह रहेगी व्यवस्था

  • 4,000 श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बड़ा प्रतीक्षालय
  • 15 हजार जूते एक साथ रखने की स्टोरेज क्षमता
  • 1,650 यात्रियों का सामान रखने को क्लाक रूम
  • 10 बेड का आपातकाली सुविधा वाला अस्पताल