जिसे 2 साल से महाराष्ट में तलाश रही 'ममता', वृंदावन के अपनाघर में मिला वो बेटा; खुशी में फूट-फूटकर रोई मां
महाराष्ट्र का एक युवक दो साल पहले घर छोड़कर वृंदावन पहुंचा और याददाश्त खो बैठा था। अपनाघर आश्रम के उपचार ...और पढ़ें

दो वर्ष पहले महाराष्ट्र निवासी युवक हुआ था गुम, बेटे को देख भावुक हुई मां।
HighLights
महाराष्ट्र का युवक दो साल पहले घर छोड़कर वृंदावन पहुंचा था।
अपनाघर आश्रम ने याददाश्त खो चुके युवक का सफल उपचार किया।
दो साल बाद वृंदावन में मां-बेटे का भावुक मिलन हुआ।
संवाद सहयोगी, वृंदावन (मथुरा)। दो वर्ष पहले महाराष्ट्र निवासी युवक बिना किसी को जानकारी दिए घर छोड़कर निकल गया और घूमते-घूमते वृंदावन पहुंच गया। लगभग डेढ़ वर्ष पहले वृंदावन की गलियों में घूम रहा युवक अपनाघर आश्रम के सदस्यों को मंदबुद्धि प्रतीत हुआ। तो उसे आश्रम में ले आए। चिकित्सकों ने जांच की तो पता चला वह अपनी याददाश्त भूल चुका है। यही कारण है गलियों में भटक रहा है। उपचार दिया, काउंसलिंग की और जब याददाश्त वापस आई तो युवक ने घर का पता बताया।
स्वजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। बेटे की जानकारी मिलते ही मां वृंदावन पहुंची और सामने बेटे को सकुशल देख कभी रोती तो कभी आश्रम के सेवादारों का आभार जताती।
गलियों में घूमता हुआ मिला था
चैतन्य विहार स्थित अपनाघर आश्रम के अध्यक्ष धन्नाराम जांदू ने बताया डेढ़ वर्ष पहले वृंदावन की गलियों में घूमते एक युवक को आश्रम सेवादारों ने देखा तो कुछ भी बता पाने में अक्षम थे। आश्रम लाकर उनके स्वास्थ का परीक्षण करवाया, तो पता चला याददाश्त चले जाने के कारण उन्हें पिछली जिंदगी के बारे में कुछ भी पता नहीं है। आश्रम में उपचार दिया और हर दिन काउंसलिंग की गई।
दो दिन पहले बताया घर का पता
दो दिन पहले पूरी तरह स्वच्छ हो चुके युवक ने बताया वह महाराष्ट्र के परभणी का निवासी अभिषूक धूत है। घर का पता पूछकर आश्रम संचालकों ने संपर्क स्थापित किया। जब स्वजनों को पता चला उनका बेटा सकुशल वृंदावन में है तो खुशी की लहर दौड़ गई और मां शकुंतला देवी स्वजनों के साथ शुक्रवार की सुबह वृंदावन पहुंची और जैसे ही बेटे को सकुशल अपने सामने देखा, खुद को रोक न सकी और गले से लगाकर रोने लगी।
मां ने जताया सेवादारों का आभार
मां की हालत ये कि कभी बेटे को देखे तो कभी सेवादारों का आभार जता रही थी। अध्यक्ष धन्नाराम जांदू ने बताया कागजी कार्रवाई पूरी करके अभिषेक धूत को उसकी मां शकुंतला के सिपुर्द कर दिया, वे गंतव्य को चले गए।
