जागरण संवाददाता, वृंदावन (मथुरा): जवाहर बाग कांड में लापरवाही से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है। आस्तिकों की नगरी वृंदावन में पहली बार नास्तिक सम्मेलन को लेकर पैदा हुए हालात से यह साफ हो गया। संत समाज इसको लेकर बुरी तरह नाराज था। दो टूक चेतावनी दी थी कि सम्मेलन न रोका तो अंजाम बुरा होगा। इसके बाद भी जिला प्रशासन पूरे मामले को हल्के में लेता रहा। बगैर अनुमति कराए जा रहे दो दिवसीय सम्मेलन को रोकने की कोई पहल नहीं की। इससे बवाल होते-होते बचा। सम्मेलन में शामिल होने आए तीन सौ से ज्यादा बाहरी लोग प्रशासन को कोसते हुए नजर आए।

कभी आस्तिक रहे बिंदू सेवा संस्थान के आचार्य बालेंदु ने गुरुवार को अचानक दो दिवसीय नास्तिक सम्मेलन की घोषणा करके सनसनी फैला दी। कई दिनों से इसकी तैयारियां चल रही थीं। देश के अलग-अलग शहरों से सैकड़ों की संख्या में अतिथियों को आमंत्रण पत्र भेजे जा चुके थे, मगर खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी। गुरुवार को बालेंदु की पत्रकार वार्ता के बाद जब मामला सामने आया तो संत समाज डीएम और एसएसपी के पास पहुंच गया। विरोध शुरू कर दिया।

शुक्रवार सुबह कार्रवाई के नाम पर आयोजन स्थल के बाहर केवल थाने का फोर्स था। बाद में सीओ सदर और सिटी मजिस्ट्रेट पहुंचे। इस समय तक तीन सौ से ज्यादा अतिथि आ चुके थे। जब विरोध भड़का तो पुलिस प्रशासन के पसीने छूट गए। सम्मेलन में शामिल होने के लिए दोपहर तक लोगों का आना जारी था। मगर, इनमें अधिकतर लोग बाहर हो रहे प्रदर्शन को देखकर उल्टे पैर वापस हो लिए। ऐसा ही एक दल टैंपो ट्रैवलर में आयोजन स्थल पहुंचा तो प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा।

महिला को भारी पड़ा प्रदर्शनकारियों का विरोध

आयोजन में शामिल होने आई महिला दयावती खुद को पत्रकार बताकर बाहर प्रदर्शनकारियों के बीच फोटोग्राफी कर रही थी। इसी बीच उसने आयोजन की हिमायत में कुछ शब्द बोले, तो प्रदर्शनकारियों ने हल्ला बोल दिया। नगर मजिस्ट्रेट रामअरज यादव और क्षेत्राधिकारी सदर आलोक दुबे ने आश्रम के अंदर भेज दिया।

रिश्तेदार महिला भी कूदी विरोध में

सम्मेलन के आयोजक बालेंदु के भाई पूर्णेंदू की सास को जब उनके इस कृत्य और आश्रम पर हो रहे विरोध की जानकारी मिली, तो वह भी उनका विरोध करने मौके पर पहुंची गई। गौरानगर कॉलोनी की निवासी अनीता वशिष्ठ ने आयोजकों को धूर्त करार देते हुए अपनी बेटी के साथ किए उत्पीड़न की कहानी बताई। उन्होंने आरोप लगाए कि 2003 में पूर्णेंदु के साथ बेटी की शादी हुई। मगर, इन भाइयों की हरकत के चलते 2005 में तलाक हो गया। उन्होंने प्रशासन से आयोजकों को जेल भेजने की मांग की।

ये रहे मौजूद

विरोध प्रदर्शन में महंत फूलडोल बिहारी दास, महामंडलेश्वर नवल गिरि, आचार्य मृदुलकांत शास्त्री, संत गो¨वदानंद तीर्थ, एसके शर्मा, श्रीकृष्ण सरस, स्वामी मोहनानंद लाल बाबा, रमेश पुजारी, अनुभूति कृष्ण गोस्वामी, महंत प्रेमदास, कांग्रेस नगर अध्यक्ष नूतन बिहारी पारीक समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

मानवता की अलख जगाने आए थे

नास्तिक सम्मेलन में शिरकत करने गुजरात के राजकोट से आए एनेस्थेटिस्ट डॉ. विजय मेहता ने कहा कि वे तो यहां मानवता की अलख जगाने आए हैं। धार्मिक भावनाओं को भड़काने का कोई इरादा नहीं। वे ईश्वर में आस्था नहीं रखते ये सही बात है। उन्होंने कहा कि मानवता सर्वोपरि है।

अधिकारी का कहना

'आयोजन को अनुमति दी ही नहीं गई थी। अगर, इसकी शुरूआत के कुछ साक्ष्य मिलेंगे तो कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।'

रामअरज यादव, सिटी मजिस्ट्रेट।