जागरण संवाददाता, मैनपुरी: दृश्य: एक

शहर में स्टेशन रोड पर हरिदर्शन नगर कालोनी के मुख्य द्वार के सामने की सड़क डलावघर बन चुकी है। दुकानदारों के अलावा सफाई कर्मचारी आसपास का कचरा लाकर यहां डंप करते हैं। दोपहर 12 बजे तक कचरे का उठान नहीं होता। आवारा जानवर कचरे को पूरी सड़क पर बिखेरते हैं। इस अव्यवस्था का स्थानीय लोगों द्वारा भी कोई विरोध नहीं किया गया। दृश्य: दो

कचहरी रोड पर जिला अस्पताल के दूसरे गेट के समीप दुकानदारों द्वारा गंदगी फेंकी जाती है। बड़ी मात्रा में मेडिकल वेस्ट भी डाला जाता है। यहां से आधा कचरा तो उठा लिया जाता है, जबकि आधा छोड़ दिया जाता है। अस्पताल के आसपास पडे़ कचरे से बीमारी फैलने का खतरा भी बना रहता है। बावजूद इसके न तो लोगों द्वारा विरोध जताया गया और न ही प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया। शहर में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था अब तक पटरी पर नहीं लौटी है। कागजों में कई बार योजनाएं बनीं। रात में कूड़ा उठान का काम भी शुरू कराया गया, लेकिन यह व्यवस्था दम तोड़ गई। पालिका के पास संसाधन और कर्मचारियों की कोई कमी नहीं है लेकिन, स्वच्छ शहर की कल्पना को अब तक पूरा नहीं किया जा सका है। यहां भी लगे रहते गंदगी के ढेर

आवास विकास कालोनी का गायत्री पार्क, बीएसएनएल जिला कार्यालय वाली सड़क, राधा रमन रोड, भांवत चौराहा, रेलवे स्टेशन परिसर, अस्पताल कालोनी, देवपुरा, हरिदर्शन नगर, राजीव गांधी नगर, रामलीला मैदान, नगरिया सहित आधा सैकड़ा सार्वजनिक स्थान और कालोनी। नालियों की सफाई में भी लापरवाही

नाला सफाई के नाम पर पालिका प्रशासन द्वारा लगभग 80 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया था लेकिन, कई जगह केवल खानापूर्ति ही हुई। जिला सहकारी बैंक से लेकर कोतवाली तक का नाला पानी से लबालब है। डीएवी इंटर कालेज रोड से एएनएम ट्रेनिग सेंटर वाला नाला भी गंदगी से पटा पड़ा है। लगभग शहर के सभी नालों और नालियों की स्थिति ऐसी ही है। सिस्टम से लेकर शहरवासी सभी बेपरवाह

शहर से लगभग 120 टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है। पालिका प्रशासन की मानें तो इसके निस्तारण के लिए लगभग 400 सफाईकर्मियों की तैनाती की गई है। वाहनों की मदद से कचरा को ट्रांसपोर्ट नगर स्थित प्लांट तक पहुंचाने का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन ज्यादातर कर्मचारी कचरा शहर के अलग-अलग स्थानों पर ही फेंक देते हैं। सफाई न होने की एक बड़ी वजह कर्मचारियों का अफसरों के घरों पर चाकरी करना भी है। ज्यादातर पालिकाकर्मी अधिशासी अधिकारी और अन्य अवर अभियंता के घरों में काम कर रहे हैं। कई को सभासदों ने अपना निजी कर्मचारी बना लिया है। संसाधनों का नहीं हो रहा इस्तेमाल

पालिका के पास पर्याप्त संख्या में छोटे और बडे़ कूडे़दान हैं, लेकिन उन्हें कालोनियों में नहीं रखवाया गया है। कूड़ा उठान के लिए खरीदी गई छोटी गाड़ियां भी गलियों में कहीं नजर नहीं आ रही हैं। ज्यादातर गाड़ियां वाटर व‌र्क्स और गोशाला में खड़ी धूल फांक रही हैं। छोटे ई-रिक्शा और हाथ रिक्शा भी उद्घाटन के बाद आज तक सड़कों पर कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। इनसे सीखें

विकास खंड सुल्तानगंज के गांव औरंध निवासी सुनील चौहान स्वच्छता के लिए लंबे समय से काम कर रहे हैं। उन्होंने गांव में युवाओं की एक टीम बना रखी है। ये टीम गांव के लोगों को सफाई की अहमियत समझा कर गंदगी के निस्तारण को प्रेरित करती है। उनकी पहल का असर अब गांव में दिख रहा है। ज्यादातर गलियां साफ हो चुकी हैं। उनका कहना है कि यदि हम सभी आपसी सहयोग से काम करें तो अपने गांव और शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है। कुछ बेहतर करने के लिए हमें सिस्टम पर निर्भरता को खत्म करना होगा। अच्छे काम की शुरुआत के लिए स्वयं ही आगे आना होगा। सावधान

जिला अस्पताल के बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डा. डीके शाक्य का कहना है कि गंदगी बीमारियों की सबसे बड़ी वजह होती है। खासकर बच्चे इनकी चपेट में जल्दी आते हैं। आमतौर पर बच्चे खेलते-खेलते कई ऐसी चीजों को छू लेते हैं जिनसे बीमारियों का खतरा होता है। गंदगी वाले हाथों से ही जब कुछ खाते या पीते हैं तो उनके साथ कीटाणु भी मुह में चले जाते हैं। जिनसे पेट दर्द, उल्टी, दस्त और गले में दर्द की समस्या बढ़ती है। बेहतर है कि कुछ भी खाने से पहले बच्चों के हाथों को जरूर धुलवाएं। सर्दी में पेट से संबंधित बीमारियां ज्यादा जोर पकड़ती हैं। अपील

स्वच्छता के लिए हमें खुद को बदलना होगा। बेहतर होगा कि संस्थाओं पर निर्भरता की बजाय अपनी जवाबदेही भी समझें। कचरे को सार्वजनिक स्थानों पर फेंकने की बजाय डस्टबिन या कूडे़दान में ही डालें। यदि ऐसा करेंगे तो निश्चित ही शहर साफ होने लगेगा।

साधना गुप्ता, पूर्व पालिकाध्यक्ष

गंदगी या कचरा कहीं बाहर से नहीं आता है। हमारे घरों से ही थोड़ा-थोड़ा कूड़ा निकलता है जो बाद में कचरे के ढेर में तब्दील होता है। सभी को आदत में बदलाव की जरूरत है। घरों में ही डस्टबिन रखें और उसमें कचरा डालें। बाद में सफाईकर्मी को वो कचरा दे दें।

राहुल भारतीय, समाजसेवी कार्यदायी संस्थाओं को भी अपनी जवाबदेही समझने की जरूरत है। जब तक जिज्ञासा नहीं जागेगी, तब तक स्वच्छता का संकल्प पूरा नहीं हो सकता है। सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके कार्य का आकलन करने की जरूरत है।

डा. सुमंत गुप्ता, समाजसेवी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर दी जाए। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ भी जुर्माने की व्यवस्था जरूरी है। जब तक जुर्माना या सख्ती नहीं होगी तब तक बेहतर व्यवस्था नहीं बन सकती। एक बार जिम्मेदारों को भी इस पर मंथन करने की जरूरत है।

घनश्यामदास गुप्ता, समाजसेवी।

Edited By: Jagran