यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
UP By Election: क्या मैनपुरी सीट फतेह कर पाएंगी मुलायम की बहू डिंपल, 2019 में सिर्फ 94389 था जीत का अंतर
By Election Mainpuri Lok Sabha Seat यूपी की मैनपुरी लोकसभा सीट की गिनती हाट सीट में होती है। 1996 से ...और पढ़ें

मैनपुरी, जेएनएन। By Election Mainpuri Lok Sabha Seat सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर पांच दिसंबर को उपचुनाव है। आठ दिसंबर को इसके नतीजे आ जाएंगे और मैनपुरी को नया सांसद मिल जाएगा। समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव का गढ़ कही जाने वाले मैनपुरी लोकसभा सीट पर इस बार कांटे की टक्कर होगी। वजह है यहां सपा से अखिलेश यादव की पत्नी और मुलायम सिंह यादव की बहू डिंपल यादव चुनावी मैदान में हैं।

2014 के मुकाबले 2019 में कमजोर थी सपा की स्थिति
भाजपा ने इस बार फिर जातीय दांव खेलते हुए मुलायम सिंह यादव के शिष्य और पूर्व में सपा के साथ रहे राघुराज शक्य को मैदान में उतारा है। राघुराज शक्य शिवपाल यादव के भी करीबी माने जाते हैं। वहीं सपा ने शिवपाल यादव को 40 स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया है यानी शिवपाल यादव बहू डिंपल के लिए वोट मांगेंगे। लेकिन अगर लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में भाजपा और सपा को मिलने वाले वोट और जीतने और हारने वाले प्रत्याशी के वोटों के बीच का अंतर देंखें तो यह चुनाव बेहद दिलचस्प हो जाता है।

लोकसभा चुनाव 2019 में सिर्फ 94389 था जीत का अंतर
2019 लोकसभा चुनाव में मैनपुरी लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव 524926 वोट पाकर चुनाव जीते थे। यहां से भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य 430537 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। मुलायम सिंह यादव की जीत का अंतर सिर्फ 94389 वोट का था। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में भी मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र से मुलायम सिंह यादव की जीत हुई थी। 2014 में उन्हें 595918 वोट मिले थे। मुलायम ने भाजपा के शत्रुघन सिंह चौहान को 364666 वोटों से हराया था। 2014 में यहां कुल 60.46 प्रतिशत वोट पड़े थे।

1996 से मैनपुरी सीट से कभी नहीं हारी सपा
सपा परिवार के घर सैफई से सटा मैनपुरी संसदीय क्षेत्र मुलायम सिंह के गढ़ के रूप में जाना जाता है। आजादी के बाद इस लोकसभा सीट से पांच बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। फिर वर्ष 1996 में पहली बार सपा के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव मैदान में उतरे और जीत हासिल की थी। इसके बाद यहां सपा को कोई हरा नहीं सका। इस दौरान तीन बार मुलायम सिंह यादव ने चुनाव जीता और दो बार उनके सीट छोड़ने पर हुए उप चुनाव में एक बार उनके भतीजे धर्मेंद्र यादव और फिर उनके पौत्र तेज प्रताप यादव सांसद बने थे।
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महागठबंधन के बाद भी जीत का अंतर था बेहद कम
लोकसभा 2019 में मुलायम के लिए इस सीट पर महागठबंधन की संयुक्त रैली हुई थी जहां बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मुलायम सिंह यादव के लिए वोट मांगे थे। इसे अपने आप में ऐतिहासिक दृश्य बताया गया था। यूपी की सियासत के दो सूरमा आपसी दुश्मनी को भुलाकर करीब 24 साल बाद चुनावी मंच पर साथ नजर आए थे। मुलायम सिंह ने भी मायावती के इस एहसान की जमकर प्रशंसा की थी और कहा कि इसे वह कभी भूल नहीं पाएंगे। मुलायम ने कहा था कि मायावती ने हमेशा उनकी मदद की है।

2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा के किसी बड़े नेता ने नहीं की थी रैली
मुलायम सिंह यादव ने घोषणा की थी कि 2019 लोक सभा चुनाव उनका आखिरी चुनाव है। मुलायम सिंंह का अंतिम चुनाव होने की वजह से भाजपा का कोई बड़ा नेता या स्टार प्रचारक 2019 लोकसभा चुनाव में मैनपुरी लोकसभा सीट पर प्रचार करने नहीं गया था। इसके बाद भी लोकसभा चुनाव 2014 के मुकाबले 2019 में भाजपा और सपा के बीच वोटों का अंतर तीन लाख से घट कर मात्र 94 हजार पर आ गया था।
