जासं, मैनपुरी : ²श्य एक

शहर के स्टेशन रोड पर वैसे तो चार से पांच स्थानों पर गंदगी का ढेर रहता है, लेकिन हरिदर्शन नगर कालोनी के मुख्य द्वार के सामने सड़क किनारे बना डलावघर हर आने-जाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ाता है। गुरुवार को भी मंदिरों के लिए इस रास्ते से जाने वाले श्रद्धालुओं को तो अच्छी-खासी परेशानी से जूझना पड़ता है। ²श्य दो

राधा रमन रोड पर भी सड़कों के किनारे लगा कचरे का ढेर समस्या बना हुआ है। सफाई कर्मचारी कालोनियों से कचरे को हाथ गाड़ी से लाकर यहां फेंक जाते हैं। दोपहर तक कचरे का उठान नहीं होने से ज्यादातर फोरलेन सड़क पर बिखर जाता है तो बचा हुआ नालों में गिर जाता है। स्वच्छता के लिए होर्डिंग पर भले ही खर्च किया जा रहा हो, लेकिन जमीन से कूडे़ की सफाई को जिम्मेदार कतई गंभीर नहीं हैं। पूरे शहर की स्थिति बद से बदतर हो गई है। हाल ही में स्वयं एडीएम द्वारा संसारपुर और नगला कबर के स्थलीय निरीक्षण में पालिका की पोल खुल गई थी। सफाई निरीक्षक को फटकार लगाते हुए उन्होंने वेतन रोकने के निर्देश दिए थे। एडीएम की सख्ती का भी पालिका के जिम्मेदारों पर कोई खास असर नहीं पड़ा। पूरे नवरात्र कूड़ा उठान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। नवमी के दिन भी श्रद्धालुओं को कूडे़ के बीच से होकर ही मंदिरों के पूजन के लिए गुजरना पड़ा। ऐसे हो सकती है बेहतर व्यवस्था

पालिका प्रशासन सभी दुकानदारों की जिम्मेदारी तय करे। रात को दुकानें बंद करने के बाद सभी दुकानदार अपने आसपास का कचरा स्वयं हटाएं और उसे डस्टविन में डालें।

- जो दुकानदार बोरियों में भरकर नारियल के खाली हिस्से भरकर फेंकते हैं, उन पर जुर्माना लगाया जाए।

- प्रत्येक दुकानदार को उसकी दुकान लगाने के लिए स्थान निर्धारित कर उन्हें उसके आसपास सफाई की जवाबदेही दी जाए।

- डिस्पोजबल गिलास और प्लेटों का इस्तेमाल करने वाले दुकानदारों को दुकान न लगाने दी जाए। इसलिए नहीं हो पा रहा निस्तारण

शहर से गंदगी दूर न होने की वजह पालिका प्रशासन की लापरवाही है। आज तक किसी भी अधिकारी ने शाम के समय में व्यवस्था का जायजा नहीं लिया। दो सफाई निरीक्षक हैं, लेकिन बेहतर प्रबंधों की पड़ताल दोनों में से किसी ने नहीं की। न तो गंदगी फैलाने वाले दुकानदारों को नोटिस दिए गए और न ही उनसे जुर्माना वसूला जा रहा है। बीमारियों के कहर को देखने के बावजूद ये आंखें बंद किए बैठे हैं। अजीब हैं सफाई निरीक्षक के तर्क

सफाई निरीक्षक शिशुपाल का कहना है कि पालिका प्रशासन द्वारा जो गाड़ियां कूड़ा उठान के लिए मंगाई गई थीं, वे हमें नहीं मिल रही हैं। हमारे कर्मचारी गलियों से कूड़ा लेकर आते हैं और पहले उन्हें डलावघरों पर डंप कराते हैं। अब पूरे शहर का कचरा एक साथ तो उठाया नहीं जा सकता। धीरे-धीरे उठान में देर तो हो ही जाती है। कूड़ा उठान में लापरवाही नहीं बरती जाएगी। रेहड़ी और पटरी दुकानदारों का चिन्हांकन कर उनकी दुकानों का दायरा निर्धारित कराया जाएगा। साथ ही कूडे़दा्रन भी रखवाए जाएंगे। इन्हीं की जिम्मेदारी होगी कि अपनी दुकान से निकलने वाले कचरे को डस्टबिन में स्वयं फेंकें। यदि सभी सहयोग करेंगे तो बेहतर प्रबंध कराए जा सकेंगे।

मनोरमा, पालिकाध्यक्ष।

Edited By: Jagran