जासं, मैनपुरी: पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार करने के साथ ही बेवर स्थित केनरा बैंक में 38 लाख रुपये के घोटाले का राजफाश कर दिया। एटा के ये दोनों आरेापित सगे भाई हैं। दोनो ने ही एटीएम से ये रकम निकाली थी। घोटाले का मास्टरमाइंड बैंक का अस्थाई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है, जिसकी पुलिस को तलाश है।

खातेदार देवेंद्र सिंह ने करीब 15 दिन पहले बैंक अधिकारियों से शिकायत की थी कि उनके खाते से लाखों रुपये निकाल लिए गए हैं। इसके बाद एक महिला सहित तीन अन्य खातेदारों ने इसी तरह की शिकायत की। बैंक मैनेजर अजय कुमार ने कुल 38 लाख रुपये निकालने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एटीएम से निकाली रकम

बैंक अधिकारियों को जांच में पता चला कि संबंधित खातों के मोबाइल नंबर बदलने के बाद नए एटीएम कार्ड जारी कराए गए। इसके बाद अलग-अलग जिलों में एटीएम से रकम समय-समय पर निकाली गई। सीसीटीवी फुटेज से मिला सुराग

पुलिस ने एटीएम में लगे सीसीटीवी खंगाले। रुपये निकालने वालों की पहचान सौरभ और उसके भाई जतिन (मलावन, एटा) के रूप में हुई। एसओ बेवर विजय गौतम और साइबर सेल के प्रभारी विक्रम सिंह ने गुरुवार को अपनी टीम के साथ मिलकर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। 4.92 लाख की नकदी कराई सीज

पकड़े गए आरोपितों के एटा स्थित बैंक खाते में 4.92 लाख रुपये की नकदी मौजूद हैं। ये नकदी आरोपितों ने केनरा बैंक के खातेदारों से हड़प कर जमा की है। पुलिस ने इन खातों को सीज करा दिया है। पुलिस का शिकंजा कसते ही छोड़ी नौकरी

सीओ भोगांव अमर बहादुर ने बताया कि सौरभ और जतिन से पूछताछ में कई जानकारियां मिलीं। ये दोनों का संपर्क बेवर निवासी एक व्यक्ति के जरिए अंकुर दीक्षित ( फर्रुखाबाद) से हुआ। अंकुर 14 साल से बैंक में चतुर्थ श्रेणी पद पर अस्थाई कर्मचारी था। उसी की मिलीभगत से बैंक में मोबाइल नंबर बदलने के साथ ही नए एटीएम कार्ड जारी कराए गए थे। पुलिस का शिकंजा कसते देख अंकुर ने नौकरी छोड़ दी थी। अंकुर दीक्षित की तलाश की जा रही है।

मैसेज रोकने को बदले गए मोबाइल नंबर

आरोपितों ने स्वीकार किया कि उन्हें मालूम था कि नकदी निकालते ही खातेदार के पास मैसेज पहुंचेगा और मामले की जानकारी हो जाएगी। इसलिए उन्होंने एटीएम कार्ड जारी कराने के साथ ही खातेदार के स्थान पर अपने मोबाइल नंबर अंकित करा दिए थे। जालसाजों की संपत्ति जब्त करेगी पुलिस

सीओ भोगांव अमर बहादुर ने बताया कि जालसाजों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही उनके द्वारा अपराध और अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने के लिए कार्रवाई की जाएगी।

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अन्य बैंककर्मियों की हो सकती है संलिप्तता

पुलिस का मानना है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा एटीएम कार्ड जारी कराने और मोबाइल नंबर बदलने जैसा काम अकेले नहीं किया जा सकता। इसके लिए बैंक अधिकारियों से अनुमति ली जाती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि घोटाले में और भी कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। बढ़ सकती है खातेदारों की संख्या

पकड़े गए आरोपितों से हुई पूछताछ के बाद पता चला है कि आरोपितों ने कई खातों से इसी तरह नकदी निकाली है। लेकिन, वे खातों की डिटेल नहीं दे सके। अनुमान लगाया जा रहा है कि जांच में पीड़ित खातेदारों की संख्या बढ़ सकती है।

Edited By: Jagran