जासं, मैनपुरी: भूगर्भ जलस्तर को ऊंचा उठाने और बारिश के पानी को सहेजने के लिए जिले में जल संरक्षण की कवायद चल रही है। बारिश के पानी को सहेजने के लिए गांव-गांव तालाबों की खोदाई कराई जा रही है। जिले में चयनित 95 तालाबों में से अब तक एक दर्जन को संवारने का काम हो चुका है। मानसून से पहले इन तालाबों के सुंदरीकरण का काम पूरा भी होने के आसार हैं।

जिले में इन दिनों बारिश के पानी को सहेजने के लिए धरातल पर काम चल रहा है। 549 ग्राम पंचायतों में तालाब सुंदरीकरण का काम जारी है। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत मजदूर सुबह ही काम पर जुटते हैं। तालाबों में जमा सिल्ट और मिट्टी को किनारों पर डाला जा रहा है, जिससे बारिश में केवल पानी ही तालाब में आ सके। किनारों को भी तीन लेयर का बनाया जा रहा है। जल संरक्षण के काम से जहां ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। वहीं, तालाब भी सहेजे जा रहे हैं। चल रहा 95 पर काम

जिले की नौ ब्लाक के 95 तालाबों पर मनरेगा से काम चल रहा है। किशनी और बेवर में सबसे ज्यादा तालाब सहेजे जा रहे हैं। इन दोनों ब्लाक में 31 तालाबों के सुंदरीकरण का काम चल रहा है। इसके अलावा जागीर में सात, बरनाहल में नौ, घिरोर में 11 और करहल में नौ, कुरावली में 11, मैनपुरी में दस और सुल्तानगंज में पांच तालाब संवारे जा रहे हैं। जिले में 95 तालाबों के सुंदरीकरण का काम मनरेगा से शुरू कराया गया है, कुछ पर तो यह काम पूरा हो चुका है, जबकि अन्य पर यह काम मानसून से पहले पूरा कराने को कहा गया है। अधिकारी भी इस काम को लगातार देख रहे हैं।

- पीसी राम, मनरेगा उपायुक्त।

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