मैनपुरी, जागरण संवाददाता। गर्मी की शुरुआत के साथ ही मरीज बढ़ने लगे हैं। लेकिन, जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी उपचार में आडे़ आ रही है। एक तरफ विशेषज्ञों की कमी, उस पर बरती जा रही लापरवाही से मरीजों को बगैर उपचार के ही वापस लौटना पड़ रहा है। ज्यादातर चिकित्सक तो अपनी प्रैक्टिस कर कमाई में मस्त हैं।

जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं फिर से चरमराने लगी हैं। गुरुवार को ओपीडी में 1300 नए मरीजों ने अपना पंजीकरण कराया। इसके अलावा करीब दो सैकड़ा पुराने मरीज भी उपचार के लिए पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों की गैरमौजूदगी की वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। न्यायालय में एक मुकदमे की सुनवाई की वजह से अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार अस्पताल से बाहर गए हुए थे। सर्जन डॉ. गौरव पारिख ऑपरेशन थियेटर में व्यस्त थे। वहीं डॉ. धर्मेंद्र की ड्यूटी नामांकन स्थल पर लगाई गई थी। जो चिकित्सक मौजूद थे, वे भी ज्यादातर समय अपने निजी चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को दे रहे थे। चिकित्सकों के न रहने से मरीजों को बगैर उपचार के ही वापस लौटना पड़ा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सागर का कहना है कि चिकित्सकों की कमी की वजह से समस्या बढ़ी है। फिर भी प्रयास है कि मरीजों को उपचार मिले। डायरिया के मरीज बढ़े: गर्मी का प्रकोप शुरू होते ही डायरिया के मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है। बुधवार की रात से गुरुवार की दोपहर तक जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में पेट दर्द और उल्टी, बुखार के मामलों से जुडे़ 31 मरीजों को भर्ती कराया गया। ईएमओ डॉ. आकांक्षा सिंह का कहना है कि प्रतिदिन मरीजो की संख्या बढ़ ही रही है। ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग उल्टी व पेट दर्द के कारण उपचार को आ रहे हैं।

Posted By: Jagran

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