जासं, मैनपुरी: अगर, सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले कुछ महीनों में वर्षों से चली आ रही मेडिकल कालेज की कवायद बहुत राहत दे सकती है। जमीन की तलाश से संबंधित औपचारिकता पूरी होने के बाद अब अस्पतालों को उपचार के लिए सुरक्षित करने पर मंथन चल रहा है। शासन स्तर से मांगी गई सुविधाओं की सूची स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा सर्वे के बाद भेज दी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जो भी फैसला होगा, वह शासन ही करेगा।

जिले में सपा शासनकाल से ही मेडिकल कालेज की स्थापना की सुगबुगाहट होती रही है। साल की शुरुआत में भोगांव तहसील क्षेत्र में मेडिकल कालेज के एकेडमिक सेशन के लिए जगह की तलाश करने के निर्देश दिए गए थे। उसके बाद से इसकी प्रगति को लेकर कोई चर्चा सार्वजनिक नहीं की गई। अब सप्ताह भर से दोबारा अस्पतालों में चर्चा तेज हो गई है। सीएमओ डा. पीपी सिंह का कहना है कि शासन स्तर से ही इसकी कार्रवाई कराई जाएगी। हमें सिर्फ जिला अस्पताल, 100 शैया और टीबी अस्पताल के अलावा अतिरिक्त उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने के लिए कहा गया था।

लिहाजा, सुविधाओं का सर्वे कराकर एक सूची बनवाकर उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। आगे क्या करना है, इसके बारे में किसी भी प्रकार की सूचना नहीं है। मेडिकल कालेज बनाए जाने से संबंधित अंतिम फैसला शासन का है। हमें निर्देश मिलेंगे तो कार्रवाई आरंभ करा देंगे। सिर्फ उपचार से संबंधित मांगी सूचना

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मांगी गई सूचना में जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और टीबी अस्पताल में विशेषज्ञों के पदों के सापेक्ष तैनाती, यहां उपलब्ध सुविधाएं, प्रतिदिन आने और रेफर होने वाले मरीजों की संख्या शामिल थी। इसके अलावा अतिरिक्त सुविधाओं में बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी यूनिट, डायलिसिस यूनिट, आरटी-पीसीआर लैब, कार्डियोलाजी, आइसीयू, वेंटीलेटर, एनएससीयू आदि की भी सूचना को शामिल किया गया है। इसलिए जरूरी है मेडिकल कालेज

मैनपुरी जिला अस्पताल में मैनपुरी के अलावा पड़ोसी जिला एटा, कासगंज, मोहम्मदाबाद, फर्रुखाबाद, औरैया, छिबरामऊ तक के मरीज आते हैं। इनमें से ज्यादातर को सैफई के लिए रेफर कर दिया है। महीने का आंकड़ा देखा जाए तो कम से एक हजार मरीज रेफर कर दिए जाते हैं या फिर उपचार न मिलने पर तीमारदार स्वयं ले जाते हैं। मेडिकल कालेज बनने के बाद इन मरीजों को यहीं उपचार मिल सकेगा। कालेज के हिसाब से तैनाती के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की समस्या भी खत्म हो जाएगी। प्रशिक्षु चिकित्सकों की मदद से भी बहुत सी सामान्य बीमारियों का उपचार दिया जा सकेगा। ये सुविधाएं, मगर लाभ नहीं

जिला अस्पताल में इस समय आइसीयू, वेंटीलेटर, कार्डियोलाजी, बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी यूनिट, डायलिसिस यूनिट, आपरेशन थियेटर आदि की सुविधा है, लेकिन विशेषज्ञों के न होने की वजह से किसी को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

Edited By: Jagran