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मैनपुरी के सौज वेटलैंड को मिला रामसर साइट का दर्जा, इको-टूरिज्म को मिलेगी नई उड़ान; युवाओं को मिलेगा रोजगार

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Fri, 16 Oct 2026 06:30 AM (IST)

मैनपुरी के सौंज वेटलैंड को रामसर साइट घोषित किया गया है, जिससे उत्तर प्रदेश में कुल रामसर स्थलों की संख्या ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. सौंज वेटलैंड को मिला रामसर साइट का दर्जा।

  2. उत्तर प्रदेश में अब कुल 14 रामसर साइट्स।

  3. इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा।

जागरण संवाददाता, मैनपुरी। इको-टूरिज्म को नई पहचान देने के लिए केंद्र सरकार ने सौज वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कर दिया। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में रामसर साइट्स की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

इससे पहले जनपद के समान पक्षी विहार को भी रामसर साइट का दर्जा मिल चुका है। इस प्रकार मैनपुरी अब दो रामसर साइट वाला जिला बन गया है। करीब 40.759 हेक्टेयर में फैला यह वेटलैंड किशनी तहसील में स्थित है। रामसर साइट में पहले से शामिल समान पक्षी विहार से इसकी दूरी लगभग पांच किलोमीटर है। सौज वेटलैंड को पहले ही ‘इंपार्टेंट बर्ड एरिया’ (आईबीए) का दर्जा मिल चुका है।

प्रभागीय वनाधिकारी शिवम मिश्र ने बताया कि यह क्षेत्र संकटग्रस्त सारस क्रेन और ब्लैक-नेक्ड स्टार्क सहित कई दुर्लभ प्रवासी व स्थानीय पक्षियों का प्रमुख और सुरक्षित प्राकृतिक आश्रय स्थल है। यहां 96 पक्षी प्रजातियां, 19 मछली प्रजातियां एवं 7 सरीसृप प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें अनेक संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

स्थानीय स्तर बढ़ेगा रोजगार 

शीतकाल में यहां 50 से लेकर 350 तक सारस के आकर्षक समूह नियमित रूप से देखे जाते हैं। गत वर्ष हुई गणना के अनुसार, 2,899 सारस पाए गए थे। डीएम डा. इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि इससे क्षेत्र में पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों का आवागमन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सहेजने के हमारे संकल्प को दर्शाती है।